US Trade Investigation: मिडिल ईस्ट की जंग के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत के खिलाफ बड़ा एक्शन लेने की तैयारी शुरू कर दी है। ट्रंप भारत पर और ज्यादा टैरिफ लगा सकते हैं। अमेरिका ने भारत की औद्योगिक उत्पादन क्षमता की जांच करने के आदेश दिए हैं। 1974 के व्यापार कानूनी की धारा 301 के तहत जांच होगी। भारत समेत करीब 16 देशों में जांच की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद भारत समेत सभी 16 देशों के सामान पर ट्रंप नया टैरिफ लगा सकते हैं।
US-India Trade Deal: भारत-अमेरिका ट्रेड डील क्यों टली? वाशिंगटन से आया नया अपडेट
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इन 16 देशों के उत्पादन की जांच होगी
अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रियर ने जांच की आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के द्वारा लगाए गए टैरिफ को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया तो राष्ट्रपति ट्रंप ने सभी देशों पर 15 प्रतिशत नया टैरिफ लगा दिया। अब भारत समेत 16 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की उत्पादन क्षमता की जांच होगी। सूची में भारत, चीन, यूरोपीय संघ, मेक्सिको, जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, इंडोनेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, वियतनाम और बांग्लादेश का नाम है।
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इस वजह से उत्पादन की जांच के आदेश
जेमीसन ग्रियर ने कहा कि अमेरिका के बड़े ट्रेड पार्टनर्स ने अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ा ली है, जिसका असर अमेरिका के ट्रेड पर पड़ रहा है, लेकिन अमेरिका अपने उद्योगों को दूसरे देशों के कारण कमजोर नहीं पड़ने देगा। कई देश अपने यहां जरूरत से ज्यादा उत्पादन करके उस सामान को अमेरिका में भेज रहे हैं। इससे जहां उनका फायदा हो रहा है, वहां अमेरिका के घरेलू उद्योगों का नुकसान हो रहा है। उत्पादन की बिक्री कम होने से अमेरिकी कंपनियां घाटे में हैं और इससे श्रमिकों को या तो नौकरी नहीं मिल रही या कम वेतन मिल रहा।
भारत के साथ 500 मिलियन डॉलर की डील
बता दें कि अमेरिका ने हाल ही में भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते की घोषणा की है। अमेरिका और भारत के बीच करीब 500 मिलियन डॉलर का व्यापार होना है। समझौते के बदले में ट्रंप सरकार ने भारत पर लगाए गए टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया। बदले में भारत ने रूस से तेल व्यापार कम करन दिया और पूरी तरह रोकने का आश्वासन भी दिया। दोनों देशों ने व्यापार समझौते को एतिहासिक बताया हे और कहा है कि ट्रेड डील से आने वाले समय में दोनों देशों के व्यापारिक संबंध और मजबूत हो सकते हैं।