Donald Trump Pitch For Nobel Prize: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कहा है कि अपने डिप्लोमैटिक रिकॉर्ड की वजह से वो नोबेल शांति पुरस्कार के हकदार हैं. उनका दावा है कि उन्होंने 8 युद्धों को सुलझाने में मदद की है. व्हाइट हाउस में मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि वे सिर्फ फैक्ट बता रहे हैं, अपनी अचीवमेंट्स का बखान नहीं कर रहे हैं. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाने के अपने रिकॉर्ड का जिक्र किया. उन्होंने ये भी संकेत दिया कि जल्द ही इस लिस्ट में एक और डिप्लोमैटिक कामयाबी जुड़ सकती है.
लंबे वक्त से नोबेल पाने की ख्वाहिश
डोनाल्ड ट्रंप अपने पहले कार्यकाल से ही नोबेल पीस प्राइज पाने की बात करते रहे हैं. उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन के साथ मुलाकात समेत उनके डिप्लोमैटिक कोशिशों को उनके नॉमिनेशन के सपोर्टर्स ने अहम तर्क के तौर पर पेश किया था. उन्होंने शांति में अपने योगदान के सबूत के तौर पर ‘अब्राहम समझौते’ (Abraham Accords) का भी जिक्र किया, जिससे इजराइल और कई अरब देशों के बीच डिप्लोमैटिक रिश्ते बने. जून 2025 में ट्रंप ने कहा था कि उन्हें लगता है कि उनका रिकॉर्ड कई नोबेल पुरस्कारों के लायक है. उनका दावा था कि उन्हें ये सम्मान 4 या 5 बार मिलना चाहिए था.
अंतरराष्ट्रीय विवादों पर दावे
डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान, इजराइल-ईरान, कंबोडिया-थाईलैंड, सर्बिया-कोसोवो, रवांडा-डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, मिस्र-इथियोपिया और आर्मेनिया-अजरबैजान जैसे कई देशों के बीच तनाव कम करने या समझौते तक पहुंचने में मदद करने का क्रेडिट अपने प्रशासन को दिया है. हालांकि, उनके कुछ दावों की आलोचना भी हुई है. मिसाल के तौर पर इंडिया ने ट्रंप के इस दावे को खारिज कर दिया है कि भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर में वॉशिंगटन की कोई भूमिका थी. भारत का कहना है कि ये फैसला दोनों देशों ने सीधे तौर पर लिया था.
किसने किया ट्रंप को सपोर्ट?
ट्रंप के नोबेल कैंपेन को राजनीतिक सहयोगियों और विदेशी नेताओं का भी समर्थन मिला है. रिपब्लिकन रिप्रेजेंटेटिव क्लाउडिया टेनी ने उन्हें 2026 के शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया, जबकि इजराइल, पाकिस्तान और कंबोडिया के नेताओं ने भी सार्वजनिक रूप से उनकी उम्मीदवारी का समर्थन किया है. हालांकि, नॉर्वेजियन नोबेल कमिटी निजी नॉमिनेशन की सार्वजनिक रूप से पुष्टि नहीं करती है. नोबेल के नियमों के तहत, नॉमिनेशन से जुड़ी जानकारी 50 साल तक गोपनीय रखी जाती है.
ईरान विवाद और नोबेल प्राइज
ईरान को लेकर बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप की ये ताजा अपील उनकी ‘शांतिदूत’ वाली छवि के लिए एक चुनौती बन गई है. अपने दावों की आलोचना और नोबेल पीस प्राइज मिलने की संभावनाओं पर संदेह के बावजूद, ट्रंप का कहना है कि उनका कूटनीतिक रिकॉर्ड उन्हें इस पुरस्कार का हकदार बनाता है.