अमेरिका ने ईरान के ग्लोबल फाइनेंशियल नेटवर्क पर चोट मारनी शुरू कर दी है. ईरान पर लगाम कसते हुए उसके सहयोगी देशों और पूरी दुनिया को धमकी दी है. अमेरिका की वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ट्रंप सरकार की ओर से ऐलान किया है कि अब जो देश ईरान के साथ रिश्ते रखेगा, अमेरिकी सरकार उस पर प्रतिबंध लगाएगी. अब जो भी देश, बैंक या संस्था ईरान के साथ पैसे का लेनदेन करेगा या मनी लॉन्ड्रिंग में उसकी मदद करेगा, अमेरिका से डॉलर सिस्टम से बाहर कर देगा. ईरान के साथ जिन देशों के रिश्ते पहले से बने हुए हैं, वे भी अपने रिश्तों को खत्म करें.

अमेरिका की आर्थिक प्रतिबंधों की धमकी के बीच ईरान की लगी लॉटरी, 7.5 ट्रिलियन क्यूबिक फीट से ज्यादा गैस का मिला भंडार

---विज्ञापन---

दुनिया के धमकी के पीछे अमेरिका का मकसद क्या?

अमेरिका की वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बताया कि ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने ईरान के उन नेटवर्क को आइडेंटिफाई कर लिया है, जिनका इस्तेमाल ईरान अपने कच्चे तेल को खपाने, आर्थिक प्रतिबंधों से बचने और फंड हासिल करने के लिए करता है. अमेरिका का मकसद ईरान के लिए रेवेन्यू का साधन बनने वाले नेटवर्क को खत्म करना है. जिन फाइनेंशियल सपोर्ट के साथ ईरान की सरकार खड़ी है, उसे जड़ से काटना है. ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों और कंपनियों को यह मानने पर मजबूर करना है कि ईरान के साथ रिश्ते रखकर वे अमेरिका के साथ दुश्मनी मोल ले रहे हैं.

ईरान से रिश्ते तोड़ने के लिए टाइमलाइन सेट की गई

स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिका का मकसद ईरान की आर्थिक लाइफलाइन को तोड़ना है, ताकि ईरान की आर्थिक सप्लाई रुके अैर वह अकेला पड़ जाए. ट्रंप सरकार ने ईरान के लिए व्यापार करने वाले 60 संस्थानों, व्यक्तियों, जहाजों पर भी नए प्रतिबंध लगाए हैं. इन सभी का कनेक्शन ईरान के परमाणु, मिसाइल और साइबर नेटवर्क है. अमेरिका ने उन सभी देशों के लिए ईरान से जुड़ी सभी गतिविधियां खत्म करने के लिए टाइमलाइन सेट की है और चेतावनी दी है कि उस टाइमलाइन में ईरान के साथ रिश्ते नहीं टूटे तो अमेरिका उस देश के खिलाफ कार्रवाई के लिए मजबूर होगा.

---विज्ञापन---

US-ईरान में फिर छिड़ेगा भीषण ‘महायुद्ध’? ट्रंप ने जारी किया होर्मुज का नया मैप, नए प्रतिबंधों पर ईरान की धमकी

ईरान की संसद के स्पीकर गलिबाफ का पलटवार

ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गलिबाफ ने अमेरिका की धमकियों पर पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका को सिर्फ 'बड़ी-बड़ी बातें' करनी आती हैं. असल में कुछ करने की हिम्मत नहीं है. ईरान के साथ व्यापार करने वाले देश अमेरिका के प्रतिबंधों की चिंता नहीं करेंगे. अमेरिका चाहे जितनी कोशिश कर ले, ईरान उसके दबाव के आगे कभी नहीं झुकेगा. ईरान होर्मुज स्ट्रेट को कभी नहीं छोड़ेगा और न अमेरिका को इस पर कब्जा करने देगा. अमेरिका जब तक अपने वादे पूरे नहीं करेगा, तब तक ईरान कोई समझौता नहीं करेगा और न ही शांति वार्ता करेगा.

---विज्ञापन---