अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के सबसे बड़े द्वीप ग्रीनलैंड को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एआई द्वारा बनाया गया एक नक्शा शेयर किया है जिसमें ग्रीनलैंड को अमेरिका के हिस्से के रूप में दिखाया गया है. उन्होंने मंगलवार को कसम खाई कि वह ग्रीनलैंड पर कंट्रोल करने के अपने लक्ष्य से किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेंगे. ट्रंप का मानना है कि ग्रीनलैंड राष्ट्रीय और वैश्विक सुरक्षा के नजरिए से बहुत जरूरी है और उन्होंने इसे जबरदस्ती लेने की संभावना से भी इनकार नहीं किया है. राष्ट्रपति ने नाटो के सेक्रेटरी जनरल से बात करते हुए साफ कर दिया कि अब इस मुद्दे पर समझौते का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मच गया है.
डेनमार्क की प्रधानमंत्री का पलटवार
ट्रंप की इस हरकत पर डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेट्टे फ्रेडरिक्सन ने बेहद सख्त लहजे में जवाब दिया है. उन्होंने साफ कहा है कि ग्रीनलैंड कोई सामान नहीं है जो बिक्री के लिए उपलब्ध हो और डेनमार्क अपनी आजादी, पहचान और सीमाओं के साथ किसी भी सूरत में समझौता नहीं करेगा. पीएम मेट्टे ने वैश्विक नेताओं को आगाह किया है कि यह केवल एक द्वीप का नहीं बल्कि पूरी वैश्विक व्यवस्था का सवाल है. उन्होंने ट्रंप की टैरिफ और व्यापार युद्ध की धमकियों पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी और कहा कि यूरोप किसी भी तरह के ब्लैकमेल के सामने नहीं झुकेगा. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका यूरोप के साथ ट्रेड वॉर शुरू करता है तो पूरा यूरोपीय संघ एकजुट होकर इसका मुंहतोड़ जवाब देगा.
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रूस का चौंकाने वाला रुख
इस पूरे विवाद में रूस की एंट्री ने मामले को और भी ज्यादा पेचीदा बना दिया है. रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने एक बयान में कहा है कि ऐतिहासिक रूप से ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वाभाविक हिस्सा नहीं है बल्कि यह एक औपनिवेशिक जीत का परिणाम है. हालांकि रूस ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसकी इस क्षेत्र में दखल देने की कोई सीधी महत्वाकांक्षा नहीं है लेकिन उनके बयान ने ट्रंप के दावों को एक तरह से हवा दे दी है. रूस का यह रुख डेनमार्क और यूरोपीय संघ के लिए चिंता का विषय बन सकता है क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की वैधता पर सवाल खड़े करता है. ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति और रूस के इन बयानों ने आर्कटिक क्षेत्र को कूटनीतिक टकराव की नई जमीन बना दिया है.
नोबेल शांति पुरस्कार की कसक
ग्रीनलैंड विवाद के साथ-साथ ट्रंप की नाराजगी नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने को लेकर भी सामने आई है. उन्होंने नॉर्वे के प्रधानमंत्री को भेजे संदेश में अपनी भड़ास निकालते हुए कहा है कि अब वह शांति की जगह केवल अमेरिकी हितों पर फोकस करेंगे. ट्रंप ने डावोस की बैठकों में भी यूरोपीय देशों पर भारी टैक्स यानी टैरिफ लगाने की धमकी दी है जिससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बन गया है. ट्रंप के इस आक्रामक रुख ने दुनिया को एक बार फिर संकट के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है जहां एक तरफ व्यापारिक युद्ध का खतरा है तो दूसरी तरफ ग्रीनलैंड जैसी संप्रभु जमीन पर कब्जे की जिद है. आने वाले समय में यह टकराव विश्व शांति और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है.
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