मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच जारी जुबानी जंग ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है. इसी बीच चीन ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता बढ़ाते हुए अमेरिका के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने सोमवार को 57 मुस्लिम देशों के संगठन ओआईसी (OIC) के महासचिव के साथ बीजिंग में एक अहम बैठक की. यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका ने ईरान की घेराबंदी के लिए अपना बड़ा नौसैनिक बेड़ा रवाना किया है और ईरान ने भी साफ कर दिया है कि उस पर हुआ कोई भी हमला पूर्ण युद्ध की शुरुआत माना जाएगा.
ट्रंप की नीतियों पर चीन का तीखा प्रहार
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने ट्रंप प्रशासन की नीतियों की कड़े शब्दों में आलोचना की है. उन्होंने कहा कि दुनिया को ‘जंगल के कानून’ की ओर लौटने से रोकना होगा जहां ताकतवर देश अपनी मर्जी से किसी पर भी पाबंदियां या सैन्य कार्रवाई थोप देते हैं. चीन का मानना है कि ट्रंप की टैरिफ नीतियों और सैन्य धमकियों से वैश्विक व्यवस्था बिगड़ रही है. चीन अब इस्लामी देशों के साथ मिलकर विकासशील देशों के अधिकारों की रक्षा करने की बात कह रहा है ताकि विवादों का समाधान बम और बारूद के बजाय बातचीत और राजनीतिक संवाद से निकाला जा सके.
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ईरान में गहराता मानवीय और सैन्य संकट
क्षेत्र में तनाव के बीच ईरान से चौंकाने वाली खबरें आ रही हैं. एक ईरानी अधिकारी ने दावा किया है कि देश में आर्थिक तंगी के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान अब तक लगभग 5,000 लोगों की मौत हो चुकी है. हालांकि इन आंकड़ों की अभी पुष्टि नहीं हुई है पर इससे वहां के बिगड़ते हालात का अंदाजा लगाया जा सकता है. दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को परमाणु कार्यक्रम और प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर कड़ी चेतावनी दी है. अमेरिका के विमान वाहक पोत और घातक मिसाइलों से लैस युद्धपोत तेजी से मिडिल ईस्ट की तरफ बढ़ रहे हैं.
वैश्विक शक्ति संतुलन बदलने की कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन इस संकट के बहाने खुद को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति और शांति के मध्यस्थ के रूप में स्थापित करना चाहता है. चीन की यह पहल न केवल क्षेत्रीय राजनीति बल्कि दुनिया के शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है. वांग यी ने साफ संदेश दिया है कि चीन मध्य पूर्व में एक सुरक्षा साझेदारी बनाना चाहता है जो बाहरी हस्तक्षेप के बजाय आपसी सहयोग पर आधारित हो. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि चीन की यह कूटनीति अमेरिका की सैन्य ताकत के आगे कितनी कारगर साबित होती है और क्या यह गठबंधन ट्रंप के फैसलों पर लगाम लगा पाएगा.
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