एक तरफ जहां दुनिया का शक्तिशाली देश अमेरिका अपनी पूरी ऊर्जा ईरान के साथ जारी संघर्ष में झोंक चुका है, वहीं दूसरी ओर चीन एक खतरनाक प्लान पर काम कर रहा है. चीन के लिए ईरान संकट एक अवसर बनकर आया है, जिससे वो चोरी-छिपे अपने प्लान को अंजाम दे सके और किसी का भी ध्यान उसकी ओर ना पड़े. हाल ही में चीन ने चुपचाप एक ऐसा दस्तावेज जारी किया है जो आने वाले दशकों की आर्थिक और सैन्य शक्ति संतुलन को बदल सकता है.

'कोई ध्यान नहीं दे रहा, यही तो मकसद है.'


5 मार्च को नेशनल पीपल कांग्रेस में पेश की गई 141 पन्नों वाली 15वीं पंचवर्षीय योजना एक सामान्य आर्थिक नीति का दस्तावेज नहीं लगता, बल्कि ये चीन की राष्ट्रीय तकनीकी अभियान का खाका है. निवेश विश्लेषक और लेखक शानका अंसेलम पेरेरा ने एक्स पर लिखा, 'कोई ध्यान नहीं दे रहा, यही तो मकसद है.' प्राप्त जानकारी के मुताबिक चीन की पंचवर्षीय योजना पूरी तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर फोकस है, जिससे भविष्य की लड़ाई का सूरत-ए-हाल बदला जा सकेगा.

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बीजिंग का खतरनाक प्लान


बीजिंग का इरादा अगले दशक में AI को अर्थव्यवस्था के अधिकांश क्षेत्रों में घोल देना है. मानवाकार रोबोटिक्स को मुख्य उद्योग का दर्जा दिया गया है, जिसके उत्पादन को पांच वर्षों में दोगुना करने का लक्ष्य है. इसके अलावा, अंतरिक्ष-पृथ्वी क्वांटम संचार नेटवर्क विकसित करने, न्यूक्लियर फ्यूजन रिसर्च को गति देने और ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस तकनीकों को आगे बढ़ाने पर प्रतिबद्धता जताई गई है. AI तकनीक बढ़ाने के लिए चीन ने उद्योगों का मूल्य 10 ट्रिलियन युआन (लगभग 1.4 ट्रिलियन डॉलर) से अधिक होने का अनुमान जताया है.

अमेरिका से 4 कदम आगे चीन


लेखक शानका अंसेलम पेरेरा के अनुसार ये चीन की आर्थिक विकास योजना नहीं, बल्कि एक ऐसा युद्ध अभियान है जिसे अमेरिका लड़ ही नहीं रहा. अमेरिका अपना पूरा ध्यान चिप बनाने पर फोकस कर रह है, जबकि चीन की योजना कहीं बड़ी है. चीन का प्लान AI पूरे अर्थतंत्र में फैलाना है, जिससे वो भविष्य के युद्ध में अमेरिका के फाइटर जेट F-35 को बिना किसी मिसाइल के भी गिरा सकेगा.

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