India China Relationship: मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग के बीच चीन ने एक फैसला किया है, जिसका कनेक्शन भारत से है। चीन ने भारत के साथ दोस्ती मजबूत करने का प्लान बनाया है। BRICS में चीन को समर्थन करने का आग्रह भारत से किया है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहते हैं कि भारत और चीन को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी समझने की बजाय साझेदार समझना चाहिए। चीन को खतरे की बजाय अवसर के रूप में देखना चाहिए। भारत और चीन दोस्त हैं, न कि जानी दुश्मन।
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अगस्त 2025 में भारत-चीन मीटिंग का किया जिक्र
विदेश मंत्री वांग का कहना है कि BRICS में चीन और भारत को सिर्फ एक दूसरे से समर्थन करना चाहिए। दोनों देशों को किसी तीसरे के हस्तक्षेप के आपसी संबंधों को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा तय किए गए रास्ते पर चलना चाहिए। दोनों नेताओं के बीच अगस्त 2025 में तियानजिन में सफल बैठक हुई थी। जिसमें 5 साल से तनावपूर्ण चल रहे संबंधों में जान फूंकने और उन्हें सुधारकर फिर से मजबूत बनाने की सहमति बनी थी।
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5 साल बाद सुधरे भारत-चीन संबंधों का हवाला दिया
तियानजिन शिखर सम्मेलन ने चीन-भारत संबंधों की नई शुरुआत से द्विपक्षीय व्यापार हुआ, जिसने एक नया रिकॉर्ड बनाया। लोगों के बीच आदान-प्रदान हुआ, जिससे दोनों देशों की जनता का लाभ हुआ। भविष्य में इस लाभदायक साझेदाारी को और मजबूत करने के लिए दोनों देशों को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी की बजाय भागीदार के रूप में अपनाना चाहिए।। दोनों को अच्छे पड़ोसी बनकर संबंधों और मित्रता को मजबूत बनानाचाहिए। सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता के लिए यह जरूरी है।
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इस साल भारत अगले साल चीन BRICS का मेजबान
बता दें कि BRICS दुनिया की अग्रणी उभरती अर्थव्यवस्थाओं का ग्रुप है। ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका इसके बेसिक मेंबर हैं। सऊदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), इथियोपिया, इंडोनेशिया और ईरान बाद में इसके मेंबर बने। इस साल 2026 में भारत 18वें ब्रिक्स समिट की मेजबानी कर रहा है। अगले साल 2027 में चीन इसकी मेजबानी करेगा। ऐसे में इस साल शी जिनपिंग भारत आएंगे और अगले साल प्रधानमंत्री मोदी चीन जाएंगे।