पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में खटास आई है. बांग्लादेश में कई भारत विरोधी संगठनों ने हिंसात्मक प्रदर्शन के दौरान भारत के खिलाफ भी जहर उगला और वर्तमान पीएम तारिक रहमान का रुख भी इंडिया के लिए दोस्ताना नहीं दिखाई देता. हालांकि जरूरत पड़ने पर हमेशा बांग्लादेश को भारत की याद आई है और समय-समय पर भारत सरकार ने पड़ोसी मुल्क की मदद भी की है. बांग्लादेश इन दिनों बिजली संकट से जूझ रहा है, जिसके चलते उसे भारत के आगे मदद का हाथ फैलाना पड़ा है.
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क्यों बिजली संकट का सामना कर रहा बांग्लादेश?
बांग्लादेश में प्राकृतिक गैस की भारी कमी का सीधा असर बिजली उत्पादन पर पड़ा है और देश के कई हिस्सों में बिजली कटौती बढ़ गई है. स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने निर्देश जारी करते हुए दुकानें, बाजार और शॉपिंग मॉल को रात 8 बजे तक बंद रखने का नियम लागू किया है. इस संकट के बीच बांग्लादेश ने भारत से भी अतिरिक्त डीजल आपूर्ति की मांग की है, जिससे बिजली और गैस की कमी से पैदा हुई परेशानी को कुछ हद तक कम किया जा सके.
बांग्लादेश ने भारत से मांगा और ज्यादा डीजल
प्राप्त जानकारी के मुताबिक बांग्लादेश सरकार का नया आदेश गुरुवार से प्रभावी हुआ है. इसके तहत दुकानों-मॉल्स को सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक ही खोलने की अनुमति होगी. हालांकि, अस्पताल, दवा की दुकानें और ग्रोसरी स्टोर्स इस पाबंदी के दायरे से बाहर रखे गए हैं. बिजली संकट के बीच बांग्लादेश ने भारत से ज्यादा डीजल उपलब्ध कराने की अपील की है. भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने तीन दिन पहले बांग्लादेश के बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्री इकबाल हसन महमूद से मुलाकात की थी. इस दौरान दोनों देशों के बीच बिजली और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई.
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