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बांग्लादेश का यूटर्न! अब नहीं खरीदेगा गुजरात की हिलसा मछली, पद्मा बताकर बेच रहे थे

Bangladesh Hilsa Import Ban: पद्मा की असली हिलसा बताकर गुजरात की मछली बेचे जाने की शिकायतों के बाद बांग्लादेश सरकार ने भारत से हिलसा के आयात पर रोक लगा दी है. पेट्रापोल सीमा के रास्ते पिछले दो महीनों में 550 टन से अधिक भारतीय हिलसा बांग्लादेश भेजी जा चुकी थी. इस फैसले से दुर्गा पूजा से पहले दोनों देशों के मछली बाजारों और आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है.

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बांग्लादेश ने भारत से हिलसा के आयात पर अचानक रोक लगा दी है. Credit: AI

Bangladesh Hilsa Import Ban : दुनिया में सबसे ज्यादा हिलसा मछली का उत्पादन और निर्यात करने वाले देश बांग्लादेश ने भारत से हिलसा के आयात पर अचानक रोक लगा दी है. बांग्लादेश सचिवालय में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद आयात परमिट रद्द करने का फैसला लिया गया. बांग्लादेश मत्स्यजीवी फेडरेशन के अध्यक्ष रवींद्रनाथ बर्मन के अनुसार, स्थानीय बाजारों में भारत से आयातित गुजरात की हिलसा को असली ‘पद्मा की हिलसा’ बताकर ऊंचे दामों में बेचा जा रहा था.
बांग्लादेशी मत्स्य विभाग ने बुधवार को एक आदेश जारी करते हुए भारतीय गुजरात हिलसा के आयात के लिए जारी किए गए कम से कम 103 अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए हैं. यह खेप बेनापोल-पेट्रापोल सीमा मार्ग से बांग्लादेश पहुंचनी थी. चालू वित्त वर्ष में 1,739.50 टन हिलसा आयात की मंजूरी मिलने के बाद लिए गए इस अचानक फैसले ने दोनों देशों के व्यापारियों को असमंजस में डाल दिया है.

यह भी पढ़ें: बांग्लादेश क्यों हो गया गुजरात पर निर्भर, कैसे बहने लगी उलटी गंगा? जानिए वजह

पद्मा और गुजरात की हिलसा में अंतर

पद्मा और मेघना नदियों की हिलसा अपने खास स्वाद, तेल और खुशबू के लिए पहचानी जाती है, जबकि गुजरात की हिलसा स्वाद और बनावट में काफी अलग होती है. पद्मा हिलसा को अन्य किस्मों की तुलना में अधिक वसायुक्त और मुलायम माना जाता है, जबकि इसका तेल अपनी अनूठी सुगंध और मिठास के लिए जाना जाता है. वहीं, गुजराती हिलसा कम वसायुक्त होती है और इसमें अंडों की मात्रा अधिक होने के कारण इसका स्वाद पूर्वी किस्मों की तुलना में अधिक कड़वा होता है. मुनाफाखोर कम कीमत में खरीदी गई भारतीय मछली को पद्मा की इलिश कहकर बेच रहे थे, जिससे ग्राहकों के साथ ठगी हो रही थी.

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बांग्लादेश में क्यों जरूरी थी भारतीय हिलसा?

बांग्लादेश दुनिया में हिलसा का सबसे बड़ा उत्पादक है, फिर भी वहां इसका उत्पादन 2022 के 5.71 लाख टन से घटकर 2025 में करीब 5 लाख टन रह गया. स्थानीय बाजारों में कीमतें 2,600 टका प्रति किलो तक पहुंच गईं. स्थानीय कमी पूरी करने के लिए गुजरात के भरूच की सस्ती हिलसा बड़े पैमाने पर आयात की जा रही थी. पश्चिम बंगाल के पेट्रापोल बॉर्डर के रास्ते बेनापोल होते हुए पिछले दो महीनों में करीब 550 टन भारतीय हिलसा बांग्लादेश भेजी जा चुकी थी. स्थानीय पद्मा और मेघना हिलसा 2,800 रुपये प्रति किलो तक बिकती है, वहीं गुजराती हिलसा करीब 1,800 रुपये में उपलब्ध हो जाती थी.

आयातकों को भारी आर्थिक नुकसान का डर

ढाका के प्रमुख आयातकों का कहना है कि उन्होंने सीमा पार भारतीय गोदामों में हिलसा की बड़ी खेप खरीदकर सुरक्षित रखी थी. अचानक निलंबन से उन्हें माल औने-पौने दामों में वापस बेचना पड़ेगा, जिससे उन्हें भारी वित्तीय नुकसान झेलना होगा. इस साल अब तक 535 मीट्रिक टन हिलसा आयात हो चुकी थी, लेकिन अब आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है.

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हावड़ा होलसेल फिश मार्केट और फिश इंपोर्टर्स एसोसिएशन के अनुसार, इस रोक के बाद अब त्योहारों के दौरान बांग्लादेश से भारत में आने वाली पद्मा की हिलसा के निर्यात पर भी संशय बन गया है. यदि बांग्लादेश से आपूर्ति नहीं होती है तो भारतीय बाजारों को पूरी तरह से म्यांमार की हिलसा पर निर्भर रहना पड़ सकता है.

यह भी पढ़ें: बांग्लादेश में भारतीय अधिकारी की रहस्यमयी मौत, ऑफिस में मिला शव; मचा हड़कंप

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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