बांग्लादेश क्यों हो गया गुजरात पर निर्भर, कैसे बहने लगी उलटी गंगा? जानिए वजह

बांग्लादेश, जो दुनिया में हिल्सा के सबसे बड़े उत्पादक देशों में शामिल है, अब गुजरात से हिल्सा मछली मंगवा रहा है. हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले दो महीनों में भारत से करीब 500 टन हिल्सा बांग्लादेश पहुंच चुकी है.

hilsa fish

बांग्लादेश क्यों हो गया गुजरात पर निर्भर? (Photo: AI)

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हिल्सा मछली का नाम आते ही आमतौर पर बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल का जिक्र होता है. लेकिन इस समय कहानी कुछ अलग है. बांग्लादेश, जो दुनिया में हिल्सा के सबसे बड़े उत्पादक देशों में शामिल है, अब गुजरात से हिल्सा मछली मंगवा रहा है. हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले दो महीनों में भारत से करीब 500 टन हिल्सा बांग्लादेश पहुंच चुकी है, जबकि आने वाले हफ्तों में 150 से 200 टन और भेजे जाने की संभावना व्यापारियों ने जताई है. यह सामान्य व्यापार के उलट स्थिति है, क्योंकि आमतौर पर बांग्लादेश से हिल्सा भारत आती रही है.

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क्या है वजह?

दरअसल, इस पूरे बदलाव के पीछे बांग्लादेश में हिल्सा के उत्पादन में आई कमी को एक प्रमुख वजह बताया जा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश में हिल्सा का सालाना उत्पादन 2022 में करीब 5.71 लाख टन से घटकर 2025 में करीब 5 लाख टन रह गया. उत्पादन में कमी के बीच वहां हिल्सा की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में स्थानीय मांग को पूरा करने के लिए बांग्लादेशी कारोबारियों ने भारत से हिल्सा खरीदना शुरू किया है. अब सवाल है कि गुजरात की हिल्सा ही बांग्लादेश क्यों जा रही है? इसका एक बड़ा कारण है गुजरात के भरूच क्षेत्र में नर्मदा नदी से मिलने वाली हिल्सा. गुजरात में नर्मदा और तापी नदियों में समुद्र से हिल्सा मछलियां प्रजनन के लिए आती हैं. गुजरात में हिल्सा का उत्पादन भी हाल के वर्षों में बढ़ा है. गुजरात सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में राज्य में हिल्सा की कुल लैंडिंग करीब 14,588 मीट्रिक टन रही, जिसमें नर्मदा क्षेत्र से आने वाली अंतर्देशीय हिल्सा की मात्रा में बढ़ोतरी दर्ज की गई.

गुजरात की हिल्सा की खासियत?

गुजरात की हिल्सा की एक खासियत उसका ज्यादा मात्रा में रो यानी मछली का अंडा होना है. भारत के कुछ बाजारों में इस तरह की हिल्सा की मांग कम रहती है, लेकिन बांग्लादेश के चटगांव और सिलहट जैसे इलाकों में हिल्सा के अंडों की काफी मांग बताई जाती है. यही वजह है कि गुजरात की रो-युक्त हिल्सा बांग्लादेशी कारोबारियों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है. कुछ मामलों में मछली के अंडों को अलग करके प्रोसेस किया जाता है, जबकि मछली का इस्तेमाल सुखाकर या नमकीन उत्पाद बनाने में भी किया जा रहा है.

कीमत भी है बड़ा फैक्टर

इस व्यापार में कीमत भी एक अहम फैक्टर है. रिपोर्टों के अनुसार, गुजरात से आने वाली हिल्सा बांग्लादेश में स्थानीय पद्मा और मेघना नदी की प्रीमियम हिल्सा की तुलना में कम कीमत पर उपलब्ध हो सकती है. इसलिए इसका इस्तेमाल स्थानीय बाजार की कमी को पूरा करने के साथ-साथ प्रोसेस्ड फिश और दूसरे उत्पादों के लिए कच्चे माल के तौर पर भी किया जा रहा है. दिलचस्प बात ये है कि हिल्सा एक ही प्रजाति की मछली है, लेकिन अलग-अलग इलाकों में इसकी मांग और पसंद अलग है. बांग्लादेश में पद्मा और मेघना की हिल्सा अपने स्वाद और सांस्कृतिक महत्व के कारण बेहद लोकप्रिय है, जबकि गुजरात की हिल्सा ने फिलहाल एक अलग बाजार तलाश लिया है.

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