मिडिल ईस्ट में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं. इसी कड़ी में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के नतांज परमाणु केंद्र पर हमला किया. खबर है कि अमेरिका और इजरायल की ताबड़तोड़ बमबारी से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई. लेकिन गनीमत ये रही कि इस दौरान कोई रेडिएटिव गैस लीक नहीं हुआ. दुनिया में जब भी किसी देश के न्यूक्लियर प्लांट या परमाणु साइट की बात होती है, तो आम लोगों के मन में एक बड़ा सवाल उठता है कि क्या इन्हीं जगहों पर परमाणु बम बनाए जाते हैं? और अगर किसी युद्ध या मिसाइल हमले में इन प्लांट्स को नुकसान पहुंचता है, तो इसके परिणाम कितने खतरनाक हो सकते हैं?

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दोनों में क्या फर्क है?

सबसे पहले ये समझना जरूरी है कि न्यूक्लियर प्लांट और परमाणु हथियार बनाने वाली जगहें अलग-अलग होती हैं. न्यूक्लियर पावर प्लांट का मेन काम बिजली बनाना होता है. इसमें यूरेनियम जैसे फ्यूल का इस्तेमाल कर नियंत्रित परमाणु प्रतिक्रिया (nuclear reaction) से ऊर्जा पैदा की जाती है, जिससे बिजली बनती है. वहीं, परमाणु बम बनाने के लिए बहुत ज्यादा सेंसेटिव और अलग तरह की तकनीक और स्पेशल ग्रेड के मैटीरियल की जरूरत होती है, जैसे हाईली एनरिच्ड यूरेनियम या प्लूटोनियम. ये काम आमतौर पर बेहद गुप्त सैन्य ठिकानों पर होता है, ना कि सामान्य बिजली उत्पादन करने वाले प्लांट्स में.

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न्यूक्लियर प्लांट पर हमला हुआ तो?

अब सवाल उठता है कि अगर किसी न्यूक्लियर प्लांट पर मिसाइल हमला हो जाए तो क्या होगा? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ये स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है, लेकिन इसका असर परमाणु बम फटने जैसा नहीं होता. अगर प्लांट को नुकसान पहुंचता है, तो रेडिएशन लीक होने का खतरा होता है, जो आसपास के इलाकों के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकता है. ऐसी स्थिति में हवा, पानी और मिट्टी तक रेडियोएक्टिव पदार्थ फैल सकते हैं, जिससे लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है. कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है और लंबे समय तक उस क्षेत्र में रहना मुश्किल हो सकता है.

कब हुई ऐसी घटनाएं?

इतिहास में भी ऐसे हादसे देखे जा चुके हैं. उदाहरण के तौर पर 1986 का चेरनोबिल हादसा और 2011 का फुकुशिमा न्यूक्लियर एक्सिडेंट, जहां बड़े स्तर पर रेडिएशन फैलने से भारी नुकसान हुआ था. हालांकि, आज के मॉडर्न न्यूक्लियर प्लांट्स में कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था होती है, जिससे किसी हमले या दुर्घटना के बावजूद बड़े नुकसान को कम किया जा सके. मोटी कंक्रीट की दीवारें, ऑटोमैटिक शटडाउन सिस्टम और कूलिंग सिस्टम जैसे उपाय जोखिम को काफी हद तक कंट्रोल करते हैं. कुल मिलाकर, न्यूक्लियर प्लांट्स में परमाणु बम नहीं बनाए जाते, लेकिन इन पर हमला होने की स्थिति में रेडिएशन का खतरा गंभीर हो सकता है. इसलिए ऐसे प्लांट्स की सुरक्षा को लेकर दुनिया भर में बेहद सख्त नियम बनाए गए हैं.

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