इजरायल के सोमालीलैंड में राजनयिक दूत नियुक्त करने के फैसले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद गहराता जा रहा है. 16 अरब और इस्लामिक देशों ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे सोमालिया की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन बताया है. कतर, सऊदी अरब, मिस्र, पाकिस्तान, तुर्की, इंडोनेशिया, जॉर्डन, कुवैत, ओमान और बाकी देशों के विदेश मंत्रियों ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि इजरायल का ये कदम अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र (UN) के सिद्धांतों के खिलाफ है.
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बयान में क्या कहा ?
इन देशों का कहना है कि सोमालीलैंड को अलग इकाई के रूप में मान्यता देना न सिर्फ सोमालिया की एकता को कमजोर करता है, बल्कि अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र में अस्थिरता भी बढ़ा सकता है. उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के एकतरफा फैसले क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं. संयुक्त बयान में ये भी कहा गया कि सोमालिया की वैध सरकार ही वहां के लोगों का प्रतिनिधित्व करती है और किसी भी बाहरी देश का अलगाववादी क्षेत्र के साथ सीधे संबंध बनाना मंजूर नहीं है.
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सोमालीलैंड की क्या प्रतिक्रिया है?
दरअसल, सोमालीलैंड ने 1991 में खुद को सोमालिया से अलग घोषित किया था, लेकिन अभी तक उसे संयुक्त राष्ट्र के किसी सदस्य देश से व्यापक मान्यता नहीं मिली है. हालांकि, इजरायल ने हाल ही में इसे एक स्वतंत्र इकाई के रूप में स्वीकार करते हुए वहां अपने राजनयिक प्रतिनिधि भेजने का फैसला किया है. इस पूरे घटनाक्रम पर सोमालीलैंड ने भी प्रतिक्रिया दी है. उसने इन देशों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वो एक स्थिर, लोकतांत्रिक और आतंकवाद-मुक्त इलाका है और इजराइल के साथ उसके रिश्ते आपसी हितों पर कायम हैं.
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