मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच भारत के लिए राहत की खबर है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से भारतीय जहाजों को गुजरने की परमिशन दे दी है। इससे भारत में एलपीजी और कच्चे तेल की आपूर्ति की दिक्कत दूर होगी। भारत के लिए इसे बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अराघची के बीच कॉल पर बात हुई।

बता दें कि गत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला कर दिया था। इसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की। ईरान ने हमले तेज करते हुए होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया था। यह एक संकरा समुद्री जलमार्ग है। भारत समेत सभी एशियाई देश एलपीजी और कच्चे तेल के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर हैं। खाड़ी देशों ने इनकी सप्लाई इसी होर्मुज स्ट्रेट से होती है। ईरान ने यह रास्ता बंद कर दिया था। इससे बाकी देशों में एलपीजी और कच्चे तेल की आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा था।

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बता दें कि ईरान और ओमान को अलग करने वाले संकरे जलमार्ग से प्रतिदिन 2 करोड़ बैरल से अधिक कच्चे तेल का परिवहन होता है। यह मात्रा वैश्विक तेल खपत का लगभग पांचवां हिस्सा और समुद्री मार्ग से होने वाले तेल व्यापार का लगभग एक चौथाई हिस्सा है। विश्व की द्रवीकृत प्राकृतिक गैस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है। जब यह प्रवाह थोड़े समय के लिए भी बाधित होता है, तो इसके गंभीर परिणाम विश्व भर के वित्तीय बाजारों, आपूर्ति श्रृंखलाओं और घरेलू बजटों पर पड़ते हैं। भारत को छूट मिलने से एलपीजी और कच्चे तेल के संकट के बड़ी राहत मिल सकती है।

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