अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रेसिप्रोकल टैरिफ की समयसीमा को 1 अगस्त तक बढ़ा दिया है। इससे भारत के व्यापारियों ने राहत की सांस ली है। व्यापारियों का मानना है कि अमेरिका 1 अगस्त के बाद टैरिफ लगाता है तो व्यापार पर असर पड़ना तय है। अमेरिका ने रेसिप्रोकल टैरिफ को लेकर ज्यादातर देशों को 1 अगस्त तक राहत दी है। वहीं टैरिफ मामले में डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को लेकर बयान दिया है।
ट्रंप बोले- भारत को करना होगा 10% का भुगतान
ट्रंप ने कहा कि अगर भारत BRICS में है तो निश्चित रूप से उसे 10% का भुगतान करना होगा। ट्रंप ने कहा कि BRICS की स्थापना हमें नुकसान पहुंचाने और हमारे डॉलर को कमजोर करने के लिए की गई थी, लेकिन डॉलर आज भी राजा है। ट्रंप ने कहा कि अगर लोग चुनौती देना चाहते हैं वो ऐसा कर सकते हैं, लेकिन उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी। उन्हें नहीं लगता कि कोई भी उस कीमत का भुगतान करने जा रहा है।
भारत भी नहीं देगा रियायत
माना जा रहा है कि अमेरिका के इस कदम के बाद भारत ने भी सख्त रवैया अपनाया है। भारत भी कृषि और डेयरी क्षेत्र में अमेरिका को टैरिफ रियायतें देना मुश्किल है। पहले माना जा रहा है कि अगर अमेरिका भारत के खुला दिल रखता है तो फिर इसे बारे में सोचा जाता, लेकिन अब मामला अलग है। जानकार कहते हैं कि जिस तरह ट्रंप अपने फैसले पर अड़े हैं, उसी तरह भारत को भी मजबूती के साथ अपने फैसले पर अडिग रहना होगा। इसके बाद ही बात बन पाएगी। बता दें कि भारत ने अब तक हस्ताक्षरित अपने किसी भी मुक्त व्यापार समझौते में डेयरी क्षेत्र के लिए दरवाजे नहीं खोले हैं।
अमेरिका ने इन देशों को भेजे पत्र
वहीं ट्रंप प्रशासन न विभिन्न देशों को पत्र भेजे, जिनमें उन देशों के सामानों पर अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले टैरिफ का विवरण है। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि किस देश को कितना टैरिफ देना होगा? ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित पत्र बांग्लादेश, बोस्निया और हर्जेगोविना, कंबोडिया, इंडोनेशिया, जापान, कजाकिस्तान, लाओ पीपुल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक, मलेशिया, सर्बिया, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड और ट्यूनीशिया को भेजे गए हैं।
ये देश अमेरिका को 'लूट' रहे
ट्रंप ने कहा है कि ये देश अमेरिका को 'लूट' रहे हैं और हम पर ऐसे टैरिफ लगा रहे हैं, जो पहले कभी किसी ने नहीं लगाए। कुछ देश ऐसे भी हैं जो 200 प्रतिशत शुल्क लगा रहे हैं और व्यापार को असंभव बना रहे हैं। अब हमारी बारी है। हम भी वहीं टैरिफ लगा रहे हैं जो हमे पहले ही लगा देना चाहिए था।