मिडिल ईस्ट में कहने को तो सीजफायर है लेकिन हालात बेहद संवेदनशील हैं। इधर, अफगानिस्तान में बैठक फेल होने के बाद अमेरिका ने हॉर्मुज स्ट्रेट में नाकेबंदी शुरू कर दी है। उधर यमन ने ईरान का खुला समर्थन शुरू कर दिया है। यमन ने दुनिया के बड़े जलमार्गों में से बाब अल मंदेब को बंद करने की धमकी दी है। हॉर्मुज स्ट्रेट के बाद ग्लोबल ट्रेड के लिए यह अहम रूट है।

40 दिनों की जंग के बाद अमेरिका और ईरान में 2 हफ्तों का सीजफायर हो चुका है। लेकिन हालात सुधरने के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं। एक इंटरव्यू में यमन मामलों के वरिष्ठ विश्लेषक अहमद नागी ने बड़ा दावा किया कि यमन का हूती आंदोलन अपने क्षेत्रीय जल क्षेत्र में स्थिति को और गंभीर बना सकता है। अगर यमन इस रास्ते को बंद कर देता है, तो तेल की कीमतों और शिपिंग इंडस्ट्री पर बड़ा असर पड़ सकता है।

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अहमद नागी के मुताबिक, अगर यमन बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट को बंद कर देता है, तो अमेरिका पर तेल की कीमतों का दबाव दोगुना हो जाएगा। ईरान पहले से ही फारस की खाड़ी में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण रखता है, और अगर ये दोनों रास्ते बंद हो जाते हैं, तो ग्लोबल एनर्जी सप्लाई ठप हो सकती है।

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नागी के मुताबिक, अगर अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी लागू करता है और ईरान को नुकसान होता है, तो हूती आंदोलन बाब-अल-मंदेब में बड़ा कदम उठा सकता है। उन्होंने कहा कि ईरान के दर्द महसूस करने पर हूती इस अहम समुद्री रास्ते पर कार्रवाई बढ़ा सकते हैं।

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यमन की चेतावनी के मुताबिक, बाब-अल-मंदेब में पाबंदी से ग्लोबल शिपिंग इंडस्ट्री पर दबाव बढ़ेगा। इससे अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन और भी तनावपूर्ण हो जाएगी, जिसका सीधा असर ग्लोबल इकोनॉमी पर पड़ेगा। तेल और दूसरी जरूरी चीजों की ढुलाई प्रभावित होगी, जिससे आर्थिक स्थिति और भी खराब हो सकती है।

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यमन के अंसारुल्लाह प्रतिरोध आंदोलन ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिका और इजरायल ईरान पर हमला करते हैं, तो वे अपने सैन्य अभियानों को तेज कर देंगे।

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