भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए बड़े व्यापार समझौते के बाद अब बांग्लादेश भी अमेरिका के साथ एक ‘सीक्रेट ट्रेड डील’ करने की तैयारी में है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये समझौता 9 फरवरी 2026 को फाइनल हो सकता है. खास बात ये है कि ये डील बांग्लादेश के आम चुनाव से ठीक पहले होने जा रही है. इस डील को लेकर बांग्लादेश में राजनीतिक और आर्थिक हलचल तेज हो गई है. बताया जा रहा है कि बांग्लादेश सरकार अमेरिका के साथ टैरिफ और व्यापार से जुड़ा समझौता कर रही है, लेकिन इसकी शर्तें अब तक सार्वजनिक नहीं की गई हैं. ना तो संसद को इसकी जानकारी दी गई है और ना ही आम जनता को. इसी वजह से इसे सीक्रेट डील कहा जा रहा है.
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चुनाव से पहले क्यों उठे सवाल?
बांग्लादेश में विपक्षी दल और अर्थशास्त्री इस डील की टाइमिंग पर सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि चुनाव से ठीक पहले इतना बड़ा फैसला लेना सही नहीं है. वो मानते हैं कि नई सरकार बनने के बाद इस डील का बोझ उसी पर पड़ेगा. साथ ही बिना चर्चा के किया गया समझौता देश के हितों को नुकसान पहुंचा सकता है. वहीं बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा रेडीमेड गारमेंट्स और टेक्सटाइल सेक्टर पर टिका है. अगर अमेरिका के साथ डील में बांग्लादेश को ज्यादा छूट नहीं मिलती, तो अमेरिकी कंपनियां भारत से ज्यादा सामान मंगवा सकती हैं.
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भारत-अमेरिका डील से बढ़ा दबाव
भारत को अमेरिका के साथ हुए समझौते में टैरिफ में बड़ी राहत मिली है. इससे भारत के निर्यातकों को फायदा हुआ है. ऐसे में बांग्लादेश को डर है कि वो अमेरिकी बाजार में पिछड़ सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका बांग्लादेश के बीच ये सीक्रेट डील होती है तो देश की आर्थिक दिशा बदल सकती है, आने वाली सरकार के लिए मुश्किलें बढ़ सकती है. ये डील दक्षिण एशिया के व्यापार संतुलन पर असर डाल सकती है. कुल मिलाकर, अमेरिका के साथ बांग्लादेश की ये गुप्त डील आर्थिक से ज्यादा राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गई है, और आने वाले दिनों में इस पर विवाद और गहराने की संभावना है.
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