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अफगानिस्तान की सैन्य ताकत कितनी है? पाकिस्तान के सामने कितना ताकतवर

अफगानिस्तान ने पहले पाकिस्तान पर हमला कर 19 चौकियां कब्जाने और 55 सैनिकों को मार गिरने का दावा किया तो वहीं पाकिस्तान ने भी पलटवार कर तालिबान के सैन्य ठिकानों को निशाना बना 72 तालिबानी मार गिराए. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि पाकिस्तान की सेना की तुलना में तालिबान की मिलिट्री ताकत कितनी है?

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Afganistan vs Pakistan Military strength comparison: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच खुली जंग का ऐलान हो चुका है. देर रात अफगानिस्तान के बाद पाकिस्तान ने भी पलटवार करते हुए तालिबान के सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की है, जिसके बाद यह सवाल बड़ा हो गया है कि क्या तालिबान के नेतृत्व वाला अफगानिस्तान जवाबी हवाई हमला करने में सक्षम है? सैन्य शक्ति के हिसाब से पाकिस्तान बहुत आगे है, लेकिन अफगानिस्तान के पास ‘गुरिल्ला वारफेयर’ का अनुभव है. जमीन से ड्रोन और छोटे हमलों के जरिए अफगानिस्तान ने पाकिस्तान की 19 चौकियों को कब्जाने का दावा किया. वहीं, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में एयर स्ट्राइक कर 72 तालिबानी मार गिराने का दावा किया है. देखें, दोनों की सैन्य ताकत?

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पाकिस्तान-अफगानिस्तान में सैन्य ताकत का अंतर

पाकिस्तान एक परमाणु शक्ति संपन्न देश है, जबकि तालिबान एक विद्रोही पृष्ठभूमि से निकला शासन है. पाकिस्तान की सेना दुनिया की टॉप 15 सबसे ताकतवर सेनाओं में शुमार है. इसके पास लगभग 6.5 लाख सक्रिय सैनिक हैं. साथ ही 170 से ज्यादा न्यूक्लियर वारहेड्स मौजूद हैं, जो इसे स्ट्रैटेजिक डिटरेंस देते हैं. दूसरी ओर, तालिबान के पास अनुमानित 1.7 लाख से 2 लाख लड़ाके हैं. संख्या में यह बड़ी ताकत दिखती है, लेकिन ट्रेनिंग, संगठन, तकनीक और संसाधनों में पाकिस्तान से बहुत पीछे है.

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यह भी पढ़ें: 19 चौकियों पर कब्जा, 55 सैनिकों की मौत… पाकिस्तान पर हमले को लेकर अफगानिस्तान ने दिया ताजा अपडेट

दोनों देशों में किसका डिफेंस सिस्टम मजबूत?

पाकिस्तान के पास आधुनिक टैंक, लंबी दूरी की आर्टिलरी, बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें, साथ ही लेयर्ड एयर डिफेंस सिस्टम हैं. न्यूक्लियर हथियार इसे क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत डिटरेंट बनाते हैं. तालिबान के पास कोई भरोसेमंद मिसाइल डिफेंस या एडवांस्ड एयर डिफेंस नहीं है. लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता भी सीमित है. हालांकि, तालिबान गुरिल्ला टैक्टिक्स, हिट एंड रन हमले, घात लगाना और सुसाइड अटैक में माहिर है. अफगानिस्तान का पहाड़ी इलाका इन टैक्टिक्स को मजबूत बनाता है.

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दोनों देशों में हवाई ताकत कितनी?

हवाई ताकत की बात की जाए तो भी दोनों के बीच बड़ा अंतर है. पाकिस्तान एयर फोर्स के पास 450 फाइटर जेट हैं, इनमें F-16 फाइटिंग फाल्कन, JF-17 थंडर, डसॉल्ट मिराज आदि शामिल हैं जो क्रॉस-बॉर्डर ऑपरेशन, सटीक बमबारी और डीप स्ट्राइक के लिए सक्षम हैं. तालिबान के पास कोई एक्टिव फाइटर जेट नहीं हैं. अमेरिकी सेना के जाने के बाद कुछ हेलीकॉप्टर मिले, जैसे UH-60 ब्लैक हॉक और Mi-17, लेकिन स्पेयर पार्ट्स, मेंटेनेंस और एक्सपर्टीज की कमी से ये ज्यादातर काम नहीं कर पाते.

दोनों देशों के पास कितने हथियार?

हथियारों के मामले में भी पाकिस्तान की स्थिति काफी मजबूत है, लेकिन अफगानिस्तान के पास सोवियत और अमेरिकी हथियारों का मिला-जुला जखीरा है. इसमें M4 और M16 राइफल्स, नाइट विजन डिवाइस, मॉडर्न कम्युनिकेशन सिस्टम, 700+ हम्वी और माइन-रेजिस्टेंट वाहन और पुराने सोवियत युग के टैंक और आर्टिलरी हैं जो ये अफगानिस्तान के ऊबड़-खाबड़ इलाकों में मोबिलिटी बढ़ाते हैं, लेकिन पाकिस्तान की एडवांस्ड टेक्नोलॉजी से मुकाबला नहीं कर पाते. वहीं, पाकिस्तान के पास 6,000 से अधिक लड़ाकू वाहन हैं और 4,600 से ज्यादा तोपें हैं.

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बॉर्डर की चुनौती और गुरिल्ला युद्ध

पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी समस्या बॉर्डर का इलाका है, जहां आम लोग, हथियारबंद ग्रुप और लोकल लड़ाके आपस में मिले रहते हैं. बड़े पैमाने पर पारंपरिक फोर्स तैनात करना इसे नुकसान पहुंचा सकता है. तालिबान इसी का फायदा उठाकर गुरिल्ला स्टाइल में हमले करता है. एक तरह से कहा जाए तो पारंपरिक और टेक्नोलॉजिकल युद्ध में पाकिस्तान स्पष्ट रूप से मजबूत है, लेकिन तालिबान की गुरिल्ला क्षमता और इलाके का फायदा इसे आसानी से नजरअंदाज नहीं होने देता.

अफगान सेना का इतिहास

अफगान सेना का सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है. अफगानिस्तान की सेना की जड़ें 18वीं शताब्दी के ‘होटक राजवंश’ और अहमद शाह दुर्रानी के काल से जुड़ी हैं. 1960 से 1990 के बीच इसे सोवियत संघ ने आधुनिक बनाया था. 1992-2001 में नजीबुल्लाह सरकार के गिरने के बाद सेना बिखर गई, जिसके बाद पहली बार तालिबान ने सत्ता संभाली. 2001-2021 में अमेरिका और ब्रिटेन ने ‘अफगान नेशनल आर्मी’ (ANA) को ट्रेनिंग दी. 2019 तक कागजों पर इसमें 1.8 लाख सैनिक थे, लेकिन भ्रष्टाचार और ‘फर्जी सैनिकों’ की समस्या ने इसे खोखला कर दिया. 2021 में अमेरिकी वापसी के बाद ANA पूरी तरह बिखर गई. वर्तमान में फसीहुद्दीन फितरत तालिबानी सेना का नेतृत्व कर रहे हैं, जिसमें पुराने लड़ाकों और पूर्व सेना के सरेंडर किए हुए जवानों को शामिल किया गया है.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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