मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष के बीच अमेरिकी सेना को एक और बड़ा झटका लगा है. अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि कल रात एक और अमेरिकी सैनिक का निधन हो गया. यह सैनिक मार्च की शुरुआत में ईरानी शासन द्वारा किए गए हमलों के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गया था. अस्पताल में लंबे इलाज के बाद भी उसकी जान नही बचाई जा सकी. इस नई मौत के साथ ही इस पूरे संघर्ष में अब तक जान गंवाने वाले अमेरिकी सैनिकों की कुल संख्या बढ़कर 8 हो गई है. यह आंकड़ा दर्शाता है कि क्षेत्र में तनाव किस कदर बढ़ चुका है और अमेरिकी सेना को कितना भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी में बड़ी क्षति
सऊदी अरब में अमेरिकी ठिकानों पर हुए हमले में यह सैनिक बुरी तरह जख्मी हुआ था. 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत जारी सैन्य कार्रवाई के दौरान शहीद होने वाला यह सातवां सैनिक बताया जा रहा है. अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के मुताबिक यह ऑपरेशन क्षेत्र में बढ़ते खतरों से निपटने के लिए शुरू किया गया था, लेकिन दुश्मन के हमलों ने अमेरिकी सुरक्षा घेरे को कड़ी चुनौती दी है. शहीद सैनिक की पहचान अभी सार्वजनिक नही की गई है. प्रोटोकॉल के मुताबिक परिवार को सूचना देने के 24 घंटे बाद ही उसका नाम बताया जाएगा. सेना ने इस दुखद घड़ी में सैनिक के परिवार के प्रति संवेदना जताई है.
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सऊदी अरब में हुआ था घातक हमला
यह सैनिक 1 मार्च को सऊदी अरब में हुए उस हमले का शिकार हुआ था जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा था. ईरानी समर्थित गुटों द्वारा किए गए उस हमले में कई अमेरिकी ठिकाने निशाने पर थे. उस वक्त कई सैनिक घायल हुए थे जिनमें से कुछ की हालत नाजुक बनी हुई थी. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अपने ट्वीट में साफ किया है कि भले ही सैनिकों की जान जा रही है, लेकिन उनके प्रमुख युद्ध अभियान अभी भी जारी रहेंगे. अमेरिका इस इलाके में अपनी पकड़ कमजोर नही होने देना चाहता और जवाबी कार्रवाई के लिए अपनी रणनीति को और ज्यादा आक्रामक बना रहा है.
मिडिल ईस्ट में छिड़ा है भीषण युद्ध
मौजूदा हालात को देखते हुए लगता है कि मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीद फिलहाल बहुत कम है. ईरान और उसके सहयोगी देशों के साथ जारी इस टकराव ने पूरे क्षेत्र को बारूद के ढेर पर खड़ा कर दिया है. अमेरिका अब अपने सैनिकों की सुरक्षा के लिए नए और कड़े कदम उठाने पर विचार कर रहा है. विशेषज्ञ मान रहे हैं कि आठ सैनिकों की मौत के बाद अमेरिकी प्रशासन पर घरेलू दबाव भी बढ़ेगा कि वह इस युद्ध को लेकर अपनी स्थिति और स्पष्ट करे. आने वाले दिनों में यह संघर्ष और भी हिंसक रूप ले सकता है क्योंकि दोनों ही पक्ष पीछे हटने को तैयार नही हैं.