11 सितंबर 2001, ये वो तारीख है जिसने अमेरिका के साथ-साथ पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था. इस दिन की सुबह रोज की तरह ही थी. वही नॉर्मल रूटीन, लोग रोजाना के जैसे काम पर जा रहे थे. लेकिन कुछ ही मिनटों में अचानक सबकुछ बदल गया. अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड टावर्स को आतंकियों ने निशाना बनाया. चार पैसेंजर विमानों को हाईजैक कर उन्हें मिसाइल की तरह इस्तेमाल करते हुए वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर अटैक किया गया, जिसके बाद उसके दोनों टावर्स में आग लग गई और चारों तरफ धुआं उठने लगा. कुछ देर बाद WTC के दोनों टावर तिनके की तरह बिखर गए.
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क्या है पूरा मामला?
अमेरिका की एयरलाइंस की फ्लाइट को सुबह 8 बजकर 46 मिनट पर न्यूयॉर्क के 110 मंजिल वाले वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला करने के लिए इस्तेमाल किया गया, जोकि बोइंग 767 विमान था. फ्लाइट ने टावर के 93वें से 99वें फ्लोर के बीच जोरदार टक्कर मारी, जिससे अचानक एक बड़ा छेद हो गया. हमले में सैकड़ों लोग मौके पर ही जान गंवा बैठे और 1300 से ज्यादा लोग टावर के ऊपर वाले फ्लोर्स में फंस गए. शुरुआत में सभी को लगा कि शायद कोई विमान गलती से या किसी तकनीकी खराबी की वजह से बिल्डिंग से टकरा गया है, लेकिन 17 मिनट बाद पता चला कि ये कोई हादसा नहीं, बल्कि सोचा-समझा आतंकी हमला है. सुबह 9 बजकर 03 मिनट पर यूनाइटेड एयरलाइंस की फ्लाइट से टावर पर एक और हमला हुआ. विमान ने अचानक अपना रास्ता बदला और WTC के साउथ टावर से जाकर टकरा गई.
किसने किया हमला?
60वीं मंजिल से टकराने के बाद टावर में जोरदार ब्लास्ट हुआ और चारों तरफ आग की लपटें उठने लगी और धुंए का गुबार बन गया. आग फैलने की वजह से इमारत दरकने लगी और उसका मलबा आसपास की बिल्डिंग पर गिरने लगा. वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले का मास्टरमांइड था अल-कायदा का ओसामा बिन लादेन. इस अटैक को 19 आतंकियों ने मिलकर अंजाम दिया, जिनमें से 15 सऊदी अरब के थे और बाकी UAE, मिस्त्र और लेबनान से थे. इनमें से कुछ आतंकी एक साल से ज्यादा वक्त से अमेरिका में रह रहे थे और उन्होंने वहां फ्लाइंग स्कूलों में विमान उड़ाने की ट्रेनिंग भी ली थी. हमले को अंजाम देने के लिए उन चारों ने प्लानिंग के तहत ईस्टर्न अमेरिका से कैलिफोर्निया जा रहे विमानों को चुना. फ्लाइट में सवार होने के कुछ देर बाद उन्होंने प्लेन को हाईजैक कर लिया और मिसाइल की तरह WTC पर हमला कर दिया. फ्लाइट 77 के टकराने से उसमें मौजूद सभी 64 लोगों की मौत हो गई और पेंटागन के 125 सैनिक और नागरिक भी मारे गए. 11 सितंबर को हुए अटैक में 3 हजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई. इनमें न्यूयॉर्क फायर डिपार्टमेंट के 343 कर्मचारी, न्यूयॉर्क पुलिस के 23 अधिकारी और पोर्ट अथॉरिटी पुलिस के 37 अधिकारी भी शामिल थे.
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