उत्तराखंड के ऋषिकेश में गंगा नदी के पवित्र तट पर हरियाणा की एक महिला पर्यटक और पुलिस के बीच तीखी बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. यह घटना 6 अप्रैल को नीलकंठ मार्ग पर फूल चट्टी इलाके के पास की बताई जा रही है जहां महिला सार्वजनिक और धार्मिक स्थान पर बैठकर शराब पी रही थी. जब ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने स्थानीय नियमों का हवाला देते हुए उसे रोकने की कोशिश की तो महिला उन पर बुरी तरह चिल्लाने लगी. महिला का गुस्सा इतना बढ़ गया कि उसने पुलिस को सरेआम खरी-खोटी सुनाना शुरू कर दिया जिसे देखकर वहां मौजूद लोग दंग रह गए.

रोजी-रोटी पर महिला का तंज

बहस के दौरान महिला को चिल्लाते हुए सुना गया कि तुम्हारी रोजी-रोटी हमसे ही चलती है जिसका मतलब था कि पर्यटकों के आने से ही स्थानीय लोगों का घर चलता है. उसने पुलिस से यह भी कहा कि वह अपने पैसों की शराब पी रही है और बेवजह पर्यटकों को निशाना बनाया जा रहा है. महिला की बदतमीजी और अड़ियल रवैया देख पुलिसकर्मी भी हैरान थे लेकिन महिला लगातार अपनी बात पर अड़ी रही. विवाद को बढ़ता देख महिला के पति ने बीच-बचाव किया और उसे किसी तरह समझा-बुझाकर वहां से दूर ले गया जिससे मामला और ज्यादा बिगड़ने से बच सका.

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पवित्र क्षेत्र के सख्त नियम

ऋषिकेश को एक आध्यात्मिक और पवित्र क्षेत्र माना जाता है जहां गंगा नदी की मर्यादा बनाए रखने के लिए शराब और मांसाहार का सेवन पूरी तरह से प्रतिबंधित है. प्रशासन और पुलिस अक्सर घाटों और नदी के किनारों पर निगरानी रखते हैं ताकि यहां की धार्मिक और प्राकृतिक सुंदरता बनी रहे. पर्यटकों से यह उम्मीद की जाती है कि वे स्थानीय भावनाओं और नियमों का सम्मान करेंगे लेकिन इस तरह की घटनाएं बार-बार सामने आती रहती हैं. गंगा किनारे शराब पीना न केवल कानूनी रूप से गलत है बल्कि यह करोड़ों लोगों की आस्था को भी गहरी चोट पहुंचाता है.

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

इस घटना के वीडियो ने इंटरनेट पर एक नई बहस छेड़ दी है जिसमें लोग पर्यटकों के आचरण और स्थानीय संस्कृति के प्रति सम्मान को लेकर सवाल उठा रहे हैं. एक यूजर ने लिखा कि मैडम आपके पैसों का स्वागत है लेकिन गंगा आपका पर्सनल बार नहीं है इसलिए मर्यादा का ध्यान रखें. वहीं दूसरे लोगों का कहना है कि यह केवल कानूनी नहीं बल्कि नैतिकता का सवाल है और किसी भी धार्मिक जगह पर ऐसी हरकत बर्दाश्त नहीं की जा सकती. लोग इस बात पर भी नाराजगी जता रहे हैं कि पर्यटन के नाम पर कुछ लोग इतनी अहंकार और अकड़ कहां से ले आते हैं जिससे वे कानून को ठेंगे पर रखने लगते हैं.