दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए छात्रों के आंदोलन और उसके बाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर आरजेडी सांसद मनोज झा के साथ चर्चा हुई. इस दौरान सवालों के जवाब में उन्होंने कहा, देखिए यह कतई उचित नहीं होता है धर्मेंद्र जी को मैं जानता हूं यह गुमराह करने वाली थ्योरी किसी पीढ़ी की किसी पीढ़ी के बारे में किसी लीडर के बारे में इसमें दम नहीं है. इसका मतलब आप मान के चलते हैं कि लोगों के अंदर स्वयं की समझ नहीं है. इन बच्चों के बारे में इन जनरेशन के बारे में उनकी चिंताओं के बारे में हमें ही कितना पता था. सरकार को तो खैर हमसे भी कम पता था. उनकी भाषा, उनकी भाव, उनकी चिंताओं के बारे में. उन्होंने आपके सामने शिक्षा में असमानता का एक आर्किटेक्चर दिया, स्थापत्य दिया. जिसमें अवसर की कमी भी एक प्रमुख मुद्दा थी. उसको स्वीकार किया जाए और आगे बढ़ा जाए .औ
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वहीं, बीते दिन 8 अगस्त को विपक्ष के नेता राहुल गांधी के प्रयागराज में हुए स्टूडेंट से जुड़े इवेंट को लेकर भी सवाल किया गया. उन्होंने कहा, अब बीजेपी से मैं क्या उम्मीद करूंगा? जिन्होंने पैलेट गन चलवाए इस जनरेशन पर, लाठियां चलवाई, कील लगी हुई लाठियां… उनको यह बोलने का हक नहीं है.
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कल मैंने दो इवेंट देखे छात्रों की गूंज प्रयागराज में और प्रधानमंत्री जी की गूंज आईआईटी दिल्ली में. बाबा साहब जी को इनवोक कर रहे थे आईआईटी दिल्ली में. राहुल जी ने क्या किया अवसर की असमानता का जिक्र किया. डिग्री लाने के बावजूद गारंटी नहीं है कि आपके पास अवसर उपलब्ध हो जाएंगे. क्या यह चिंता देश की नहीं है. क्या बीजेपी की यह चिंता नहीं होनी चाहिए. प्रधानमंत्री जी 14 में जब चुने गए थे 2 करोड़ नौकरी प्रतिवर्ष की बात कही थी. मंदिर मस्जिद के साइज के लिए नहीं चुने गए थे.
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