महाराष्ट्र के पुणे में गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ अपराधिक मानहानि के मामले में चल रही सुनवाई के दौरान सावरकर के पोते सात्यकी ने कुछ ऐसा कहा जिसकी हर ओर चर्चा होने लगी. सात्यकी ने पुणे कोर्ट में कहा कि सावरकर गाय की पूजा के खिलाफ थे और उसे कुत्ते या गधे जैसा उपयोगी पशु मानते थे. इस दौरान पुणे के विशेष एमपी एमएलए कोर्ट में विनायक दामोदर सावरकर के पोते सात्यकी सावरकर ने अदालत में स्वीकार किया कि उनके दादा हमेशा से गाय को सिर्फ एक उपयोगी जानवर मानते थे और वह गाय की पूजा के सख्त खिलाफ थे.
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सात्यकी सावरकर वर्तमान में राहुल गांधी के खिलाफ दायर किए गए अपराधिक मानहानि केस में जिरह का सामना कर रहे हैं. राहुल गांधी के वकील मिलिंद पवार जब सात्यकी से क्रॉस एग्जामिनेशन कर रहे थे तब उन्होंने सावरकर की लिखी किताब विज्ञान निष्ठ निबंध यानी वैज्ञानिक तर्क पर आधारित निबंध का जिक्र किया. सातकी ने अदालत में स्वीकार किया कि यह किताब सावरकर ने ही लिखी है और उन्होंने किताब के उन अंशों से भी सहमति जताई जिनमें गाय को देवी मानकर पूजने के विचार की कड़ी आलोचना की गई.
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किताब के हवाले से कोर्ट में बताया गया कि सावरकर का स्पष्ट मानना था कि गाय सिर्फ एक जानवर है. सात्यकी ने स्वीकार किया कि सावरकर ने लिखा था कि देवताओं की श्रेणी में ऐसे जीव आते हैं. चाहे वह असली हो या काल्पनिक जो इंसानों से श्रेष्ठ होते हैं. जिनके गुण, शक्तियां और नेक खूबियां इंसानों की तुलना में कहीं ज्यादा विकसित होती है. ऐसे जीवों को ही देवता या देवी कहा जाता है. दूसरी ओर जानवर इंसानों से भी निचली श्रेणी में आते हैं. इंसानों से ऊपर देवता होते हैं और इंसानों से नीचे जानवर और कीड़े-मकोड़े. गाय साफ तौर पर एक जानवर है.
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