Rahul Gandhi Podcast: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पॉडकास्ट में देश की महिलाओं के नाम एक विशेष संदेश जारी करते हुए उन्हें अपनी आजादी, सम्मान और पहचान के लिए आगे आने को कहा है. हाल ही में पुणे में महिलाओं की एक बड़ी सभा में दिए अपने ‘ब्रेक द केज’ (पिंजरा तोड़ो) प्रेजेंटेशन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनका मकसद राजनीति करना नहीं, बल्कि महिलाओं को सोचने और अपनी आवाज उठाने के लिए प्रेरित करना है. राहुल गांधी ने कहा कि लोग अक्सर भारत की ताकत के रूप में अर्थव्यवस्था या सेना को देखते हैं, लेकिन उनकी नजर में भारत की असली ताकत देश की 70 करोड़ महिलाएं हैं. उन्होंने कहा कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक संवेदनशील, दयालु और भविष्य की सोच रखने वाली होती हैं.
सिर्फ तीन खानों में न सिमटे पहचान
उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि पुरुषों द्वारा महिलाओं को हमेशा सिर्फ तीन दायरों- बेटी, पत्नी या मां के रूप में ही देखा जाता है. राहुल गांधी ने कहा कि इन भूमिकाओं में कोई बुराई नहीं है, लेकिन यही एक महिला की एकमात्र पहचान नहीं हो सकती. आज महिलाएं प्रोफेशनल, खिलाड़ी और विद्वान बनकर असाधारण काम कर रही हैं. महिला किसी और की नहीं, बल्कि अपनी खुद की पहचान रखती है.
---विज्ञापन---
हिंसा और नियंत्रण के खिलाफ आवाज
राहुल गांधी ने समाज में महिलाओं पर नियंत्रण के तीन प्रमुख तरीकों-हिंसा, अनादर और वक्त के असमान बंटवारे पर चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या, सड़कों पर उत्पीड़न, संपत्ति के अधिकार में कमी (केवल 8% महिलाओं के पास प्रॉपर्टी) और घरेलू जिम्मेदारियों का भारी बोझ महिलाओं को पीछे धकेलता है.
उन्होंने कहा कि असली लड़ाई किसी एक घटना या कानून के खिलाफ नहीं, बल्कि उस सोच के खिलाफ है जो महिला को पिंजरे में बंद रखना चाहती है. राहुल गांधी ने महिलाओं से अपील की कि वे पितृसत्तात्मक सोच के खिलाफ बुलंद आवाज में बोलें, खुद पर गर्व करें और समाज में अपनी बराबरी के हक के लिए लड़ें.
---विज्ञापन---