Vish Yoga: कुंडली में विष योग का बनना बहुत ही अशुभ माना जाता है. इसके कारण जीवन में परेशानियां बढ़ जाती है. अगर जन्म कुंडली में चंद्रमा शनि के साथ युति करें या कुंडली में चंद्रमा तृतीय और सप्तम भाव में हो, तो इसके कारण विष योग बनता है. चंद्रमा की शनि की युति विष योग का कारण बनती है. विष योग के कारण मन पर नकारात्मक विचार आने लगते हैं. इसके कारण मन नकारात्मक विचारों से ढक जाता है. इसके कारण व्यक्ति शुभ समय में भी अशुभ की ही कल्पना करता है.
विष योग
जीवन में कितना भी शुभ हो व्यक्ति परेशान रहता है. मानसिक तौर पर व्यक्ति परेशान रहता है. ऐसे लोगों को सुख छिन जाने का भय होता है. इन लोगों का जीवन भय में बीतता है. नकारात्मक विचार के कारण जीवन नर्क जैसा बन जाता है. अपने भविष्य को लेकर, परिवार को लेकर और जीवन को लेकर मन में नकारात्मक विचार आना विष योग के कारण होता है. अगर कुंडली में चंद्रमा और शनि दोनों ग्रह 10 डिग्री से कम की दूरी पर होते हैं, तो विष योग अधिक प्रभावी होता है. कुंडली के 8वें, 6वें, 12वें और लग्न भाव में यह अधिक प्रभावी होता है.
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विष योग को दूर करने के उपाय
विष योग से परेशान हैं, तो आपको इसे दूर करने के लिए भगवान शिव के "ॐ जूं सः" मंत्र का जाप करना चाहिए. इस मंत्र के जाप से लाभ मिलेगा. विष योग को दूर करने के लिए शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं. ऐसा करने से आपको लाभ मिलेगा. इसके साथ ही गुड़, रेवड़ी और तिल के लड्डू को शनि मंदिर में भोग लगाना चाहिए. विष योग से राहत के लिए श्रीमदभागवत और श्रीहरिवंश पुराण का पाठ करना चाहिए. यह शुभ माना जाता है. आपको माथे पर चंदन का तिलक लगाना चाहिए. इसके बारे में अधिक जानने के लिए ऊपर दिए गए वीडियो को देखें.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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