Diwali 2026 Upay: दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश जी की पूजा की जाती है. आप दिवाली पर्व पर विधि-विधान से मां लक्ष्मी और गणेश जी की अराधना करें. आपको पूजा के साथ ही श्री सूक्त के दिव्य मंत्रों का जाप करना चाहिए. श्री सूक्त के 16 मंत्रों का जाप करने से आपको मां लक्ष्मी का विशेष आशीर्वाद मिलेगा. इसके साथ ही आपको कई उपायों को करना चाहिए. दिवाली पर श्री सूक्त का पाठ करने और इससे जुड़े उपायों के बारे में जानते हैं.
श्री सूक्त पाठ के लिए नियम
श्री सूक्त का पाठ करने से पहले मां लक्ष्मी के सामने घी का एक दिया जलाना चाहिए. मां लक्ष्मी को लाल गुलाब, कमल का फूल, गुलहल का फूल अर्पित करें. श्री सूक्त का पाठ पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके ही करना चाहिए. आप श्री सूक्त का पाठ करते समय पूरा ध्यान मां लक्ष्मी की ओर लगाएं. आप संस्कृत में पाठ ना कर पाए तो धीरे-धीरे हिंदी में साफ उच्चारण करें. मां लक्ष्मी की पूजा के साथ ही श्री सूक्त का पाठ करने से मां लक्ष्मी की कृपा से जीवन में सुख समृद्धि का आगमन होगा.
श्री सूक्त पाठ (Shri Sukt Path)
ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्त्रजाम्।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आ वह॥ (1)
ॐ तां म आ वह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् ।
यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम॥ (2)
ॐ अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनाद्प्रमोदिनिम।
श्रियं देविमुप हव्ये श्रीर्मा देवी जुषताम ॥ (3)
ॐ कां सोस्मितां हिरण्य्प्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम्।
पद्मेस्थितां पदमवर्णां तामिहोप हवये श्रियम्॥ (4)
ॐ चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्ती श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम्।
तां पद्मिनीमी शरणं प्रपधे अलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे॥ (5)
ॐ आदित्यवर्णे तप्सोअधि जातो वनस्पतिस्तव वृक्षोsथ बिल्वः।
तस्य फलानि तपसा नुदन्तु या अन्तरा याष्च बाह्य अलक्ष्मीः॥ (6)
उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह।
प्रदुर्भूतोsस्मि राष्ट्रेsस्मिन कीर्तिमृद्धिं ददातु में ॥ (7)
क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठमलक्ष्मीं नाशयाम्यहम्।
अभूतिमसमृद्धि च सर्वां निर्णुद में गृहात्॥ (8)
गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यापुष्टां करीषिणीम्।
ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोप हवये श्रियम्। (9)
मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि।
पशुनां रूपमन्नस्य मयि श्रियं श्रयतां यशः॥ (10)
कर्दमेन प्रजा भूता मयि संभव कर्दम।
श्रियम वास्य मे कुले मातरं पद्ममालिनीम्॥ (11)
आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस् मे गृहे।
नि च देवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले ॥ (12)
आद्रॉ पुष्करिणीं पुष्टिं पिंगलां पदमालिनीम्।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मी जातवेदो म आ वह॥ (13)
आद्रां यः करिणीं यष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम्।
सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मी जातवेदो म आ वह॥ (14 )
तां म आवह जातवेदो लक्ष्मी मनपगामिनीम् ।
यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्योsश्रान विन्देयं पुरुषानहम्॥ (15)
यः शुचिः प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम्।
सूक्तं पञ्चदशर्च च श्रीकामः सततं जपेत्॥ (16)
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.