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डॉ. रमन सिंह ने सुनाई छत्तीसगढ़ के विकास की गाथा, देखें पूर्व सीएम का Exclusive इंटरव्यू

छत्तीसगढ़ के रजत जयंती वर्ष पर आयोजित News 24 के रजत सम्मेलन में डॉ. रमन सिंह ने राज्य की 25 साल की यात्रा पर खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ की राजधानी नागपुर से भोपाल और फिर 2000 में एक अलग राज्य बनने की ऐतिहासिक प्रक्रिया के बीच कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. रमन सिंह ने कहा कि जब उन्होंने 2003 में मुख्यमंत्री पद संभाला, तब राज्य में कुपोषण, IMR और MMR जैसी गंभीर समस्याएं थीं.

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News24 छत्तीसगढ़ के कार्यक्रम में शामिल हुए विधानसभा स्पीकर डॉ. रमन सिंह

छत्तीसगढ़ के रजत जयंती वर्ष के मौके पर आयोजित News 24 के रजत सम्मेलन इवेंट के तहत ‘कल आज और कल’ कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह भी शामिल हुए. उन्होंने सवालों के जवाब दिए, साथ ही प्रदेश के 25 साल की गाथा, आगे के विजन और भविष्य पर खुलकर बातचीत की.

डॉ. रमन सिंह ने कहा कि पहले छत्तीसगढ़ सीपी और बरार का हिस्सा हुआ करता था. नागपुर हमारी राजधानी थी. फिर भाषा के आधार पर 1956 में जब राज्यों का गठन हुआ तो भोपाल हमारी राजधानी बनी. नागपुर से हम भोपाल शिफ्ट हुए और यह तीसरा पड़ाव था. जब 2000 में अटल बिहारी वाजपेयी जी प्रधानमंत्री बने तो तीन राज्यों का निर्माण किया गया और छत्तीसगढ़ की जनता को एक राज्य का उपहार मिला. मैं 2003 में मुख्यमंत्री के हैसियत से राज्य में आया. तब छत्तीसगढ़ में IMR (Infant Mortality Rate), MMR और कुपोषण ही था. हमने 9,600 करोड़ के बजट के साथ यात्रा की शुरुआत की. उन्होंने कहा कि मैंने मुख्यमंत्री रहते हुए महसूस किया कि खाद के गोदाम भरे हुए हैं लेकिन गरीबों के पेट खाली हैं. जब तक छत्तीसगढ़ का कोई बच्चा रात को भूखा सोता है तब तक मुख्यमंत्री को नींद नहीं आनी चाहिए. मैं पहले भी यह कहता था कि 65 लाख लोगों के जीवन में परिवर्तन आया.

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