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8वें वेतन आयोग से पहले कर्मचारियों के लिए बड़ा फैसला, EPFO ने बहाल की हायर पेंशन की सुविधा

8वें वेतन आयोग से पहले EPFO ने कर्मचारियों को गुड न्यूज देते हुए EPFO ने फिर से हायर पेंशन सुविधा को बहाल किया है. सुविधा का लाभ उठाने वाले कर्मचारी ज्यादा पेंशन योगदान दे सकेंगे. इस सुविधा को 12 साल पहले सितंबर में बंद कर दिया गया था, जिसे अब फिर से बहाल किया गया है.

8वें वेतन आयोग से पहले कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की ओर से हाल ही में एक बड़ी राहत दी गई है. दरअसल, हाल ही में इंप्लाइज पेंशन स्कीम के तहत EPFO ने हायर पेंशनवाली पुरानी सुविधा को बहाल कर दिया है. अब कर्मचारी एक्चुअल के आधार पर ज्यादा पेंशन योगदान का विकल्प फिर से चुन सकेंगे. यह गुड न्यूज मुख्य रूप से उन कर्मचारियों के लिए है जो 2014 से पहले हायर पेंशन ऑप्शन चुन चुके थे. अब वे अपनी पूरी बेसिक सैलरी और DA पर पेंशन योगदान का लाभ फिर ले सकेंगे, जिससे रिटायरमेंट के बाद पेंशन पहले से काफी ज्यादा मिल सकती है. आइए समझते हैं इसका फायदा आखिर किन-किन कर्मचारियों को होगा.

किसे मिलेगा इसका सबसे ज्यादा फायदा?

यह सुविधा मुख्य रूप से उन सीनियर कर्मचारियों के लिए फायदेमंद है जिनकी बेसिक सैलरी अधिक है, भले ही उन्हें एकमुश्त मिलने वाला फंड थोड़ा कम मिले. हायर पेंशन बहाल सुविधा का लाभ सिर्फ उन कर्मचारियों को मिल सकता है, जिन्होंने 1 सितंबर 2014 के संशोधन से पहले हायर पेंशन ऑप्शन चुना था. यानी ये सभी ईपीएफओ मेंबर्स पर लागू नहीं होता है. बिजनेस टुडे पर छपी रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि यह कोई नया लाभ नहीं है, बल्कि पूर्व प्रावधान की बहाली मात्र है. इस बहाली को 2014 में लागू हुई सैलरी लिमिट के बाद से चली आ रही उलझन को दूर करने की दिशा में बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है.

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इस सुविधा का लाभ हर किसी को नहीं

इस सुविधा का लाभ हर किसी के लिए नहीं है. वे कर्मचारी जिन्होंने अपनी नौकरी की शुरुआत 1 सितंबर 2014 के बाद की है, वे इस 'हायर पेंशन' विकल्प के पात्र नहीं हैं. उनके लिए 15,000 रुपये की पेंशन योग्य वेतन सीमा ही लागू रहेगी. न्यूनतम वेतन सीमा वाले, जिन्होंने हमेशा केवल सरकार द्वारा तय सीमा पर ही पीएफ कटवाया है और कभी वास्तविक वेतन पर योगदान का विकल्प नहीं चुना. रिटायर्ड कर्मचारी, जो 1 सितंबर 2014 से पहले ही रिटायर हो चुके थे और जिन्होंने उस समय हायर पेंशन का विकल्प नहीं दिया था.

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EPFO ने क्यों बंद किया था ये विकल्प?

1 सितंबर 2014 से पहले कर्मचारियों को मूल वेतन के आधार पर पेंशन योगदान को बढ़ाने का ऑप्शन मिलता था. खासतौर पर पीएसयू कर्मचारियों को इसका बड़ा फायदा होता था, लेकिन फिर सैलरी लिमिट तय किए जाने के बाद हायर पेंशन का यह विकल्प बंद कर दिया गया. बता दें कि ईपीएस का कैलकुलेशन जिस पेंशन योग्य वेतन पर होता है, उसकी मैक्सिमम लिमिट 15,000 रुपये निर्धारित है. 2014 के बाद भर्ती होने वाले या जिनका वेतन इस सीमा से अधिक है, ऐसे कर्मचारी अपने पेंशन योगदान को वास्तविक मूल वेतन पर आधारित नहीं कर सकते, जिससे उनके संभावित पेंशन लाभ सीमित हो जाते हैं.

अभी क्या है EPF का कैलकुलेशन?

इसे साफ शब्दों में समझें, तो 2014 में लागू की गई मौजूदा सीमा के अनुसार, न्यूनतम ईपीएस मासिक पेंशन 1,000 रुपये और अधिकतम पेंशन योग्य वेतन 15,000 रुपये निर्धारित है. इसके चलते अधिकतम संभव EPS मासिक पेंशन 7,500 रुपये तक सीमित कर दी गई. EPFO के वर्तमान नियमों को देखें, तो कर्मचारी और नियोक्ता दोनों बेसिक सैलरी और डीए का 12% हिस्सा EPF खाते में जमा करते हैं. इनमें नियोक्ता के योगदान में से 8.33% हिस्सा कर्मचारी पेंशन स्कीम (EPS) में चला जाता है. वहीं 3.67% पीएफ अकाउंट में जमा होता है. ईपीएस में गया पैसा है रिटायरमेंट के बाद मंथली पेंशन के रूप में कर्मचारी को मिलता है.


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