मुख्य बिंदु

  • कौघा के पास भारी बारिश की वजह से भूस्खलन हुआ, जिससे रामनगर-उधमपुर सड़क बंद हो गई.
  • भारी मशीनों का इस्तेमाल करके तुरंत मलबा हटाने का काम शुरू किया गया.
  • लोगों को सलाह दी गई है कि वे भूस्खलन वाली जगहों पर जाने और बिना जरूरत के यात्रा करने से बचें.
  • IMD का अनुमान है कि जुलाई 2026 में पूरे भारत में बारिश सामान्य से कम होगी.
  • आने वाले दिनों में जम्मू-कश्मीर में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के मज़बूत होने की संभावना है.

Ramnagar-Udhampur Road Closed Following Landslide: जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश के कारण शनिवार सुबह कौघा के पास जबरदस्त भूस्खलन हुआ, जिससे रामनगर-उधमपुर सड़क को कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा और ट्रैफिक डिस्टर्ब हो गया. सड़क पर बड़े-बड़े पत्थर और मलबा आ गिरा, जिससे ये रास्ता यात्रियों के लिए असुरक्षित हो गया और स्थानीय अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई करनी पड़ी.

मौके पर प्रशासन

घटना की सूचना मिलते ही अधिकारी प्रभावित जगह पर पहुंच गए. मलबा हटाने और जल्द से जल्द रास्ता बहाल करने के लिए भारी अर्थ-मूविंग मशीन लगाई गई. अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए सड़क साफ करने का काम तुरंत शुरू कर दिया गया.

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पत्थरों को हटाने का काम

सड़क ठेकेदार पुष्पिंदर सिंह ने बताया कि प्रशासन को सुबह करीब 7:00 बजे रास्ते के बंद होने की सूचना मिली. सूचना मिलने के बाद, मेंटेनेंस टीमों ने जरूरी मशीनरी का इंतजाम किया और गिरे हुए पत्थरों को हटाना शुरू कर दिया. उन्होंने भरोसा जताया कि मलबा पूरी तरह साफ होने और सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद सड़क जल्द ही फिर से खोल दी जाएगी.

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बेवजह यात्रा न करने की अपील

इस बीच, गंडोह के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट अरुण कुमार बड्यााल ने लोगों से सावधान रहने को कहा क्योंकि पूरे इलाके में मौसम खराब बना हुआ है. उन्होंने लोगों को भूस्खलन की आशंका वाले इलाकों से दूर रहने और बेवजह यात्रा न करने की सलाह दी, खासकर पहाड़ी इलाकों में जहाँ भारी बारिश से और भूस्खलन, अचानक बाढ़ या सड़क जाम हो सकता है.

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वाहन चालकों को सलाह

अधिकारियों ने वाहन चालकों से भी अपील की है कि वो सफर शुरू करने से पहले ट्रैफ़िक से जुड़ी आधिकारिक सलाह का पालन करें. यात्रियों को सरकारी घोषणाओं के ज़रिए अपडेट रहने के लिए कहा गया है, क्योंकि पहाड़ी इलाकों में मौसम तेजी से बदल सकता है.

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ज्यादा बारिश का अनुमान

इसके अलावा, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अनुमान लगाया है कि जुलाई 2026 में पूरे देश में बारिश लंबे समय के औसत से कम रहने की संभावना है. हालांकि, उत्तर-पश्चिम भारत, उत्तर-पूर्व भारत, पूर्वी-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र के कुछ हिस्सों में सामान्य या सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है. मौसम एजेंसी ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सीजन के दौरान न्यूट्रल इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की स्थिति बने रहने की उम्मीद है, जबकि प्रशांत महासागर में अभी कमजोर अल-नीनो-सदर्न ऑसिलेशन (ENSO) की स्थिति बनी हुई है.

'मौसम से रखें नजर'

इससे पहले, भारत में एक सदी से भी ज़्यादा समय में सबसे कम बारिश वाले जून महीनों में से एक देखा गया, जिसमें बारिश सामान्य से काफ़ी कम रही. देश भर में बारिश की कमी के बावजूद, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के धीरे-धीरे उत्तरी राज्यों (पूरे जम्मू-कश्मीर क्षेत्र सहित) में आगे बढ़ने की उम्मीद है, जिससे आने वाले दिनों में और बारिश होगी. अधिकारी मौसम की बदलती स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं.

निष्कर्ष

कौघा के पास हुआ भूस्खलन जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश से जुड़े खतरों को दिखाता है. स्थानीय अधिकारियों की तेज़ी से की गई कार्रवाई से बिना देरी के बहाली का काम शुरू हो सका, लेकिन यात्रियों को सलाह दी जाती है कि जब तक रास्ता पूरी तरह साफ न हो जाए, तब तक सावधानी बरतें. जैसे-जैसे मॉनसून की स्थिति बदल रही है, लोगों को मौसम के पूर्वानुमान और ट्रैफिक से जुड़ी आधिकारिक सलाह पर नजर रखनी चाहिए. सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करने से भूस्खलन, फ्लैश फ्लड और मौसम से जुड़े दूसरे खतरों को कम करने में मदद मिल सकती है.