मुख्य बिंदु
- KMRL अलुवा मेट्रो स्टेशन से कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक वॉटर मेट्रो के विस्तार की योजना बना रही है.
- वॉटर मेट्रो के प्रपोज्ड रूट पेरियार नदी से होकर गुजरेगा, जो एयर ट्रैवलर्स के लिए खुशखबरी है.
- एससीएमएस वॉटर इंस्टीट्यूट इस प्रोजेक्ट की एक डिटेल्ड फीजिबिलिटी स्टडी करेगा.
- इस स्टडी में बाढ़ के पैटर्न, नदी के बहाव, नेविगेशन और पर्यावरण के हालात का आकलन किया जाएगा.
- इस प्रोजेक्ट का मकसद सड़क पर भीड़ को कम करते हुए मेट्रो से एयरपोर्ट तक का आसान कनेक्शन देना है.
Kochi Water Metro Expansion: कोच्चि जल्द ही अपने शहर के लोगों के लिए कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक कनेक्टिविटी का एक तेज और ईको फ्रेंडली तरीका शुरू कर सकता है, क्योंकि कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड (KMRL) अपने वॉटर मेट्रो नेटवर्क के एक्सपेंशन का प्लान कर रही है. इस प्रपोज्ड प्रोजेक्ट का मकसद अलुवा मेट्रो स्टेशन को पेरियार नदी के जरिए कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट (CIAL) से जोड़ना है, जिससे मेट्रो रेल और वॉटर ट्रांसपोर्ट को मिलाकर एक इंटीग्रेटेड जर्नी का एक्सपीरिएंस मिल सके.
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क्या है पूरा प्लान?
इस प्लान कितना प्रैक्टिल है इसको एवैल्युएट करने के लिए, केएमआरएल ने एससीएमएस वॉटर इंस्टीट्यूट के साथ एक MoU साइन किया है. ये इंस्टीट्यूट एक डिटेल्ड फीडिबिलिटी स्टडी करेगा ताकि ये पता लगाया जा सके कि प्रपोज्ड रूट रेगुलर पैसेंजर ऑपरेशन के लिए तकनीकी और एनवायरनमेंट के नजरिये सही है या नहीं.
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प्रोजेक्ट के चैलेंजेज
स्टडी के हिस्से के तौर पर, SCMS वॉटर इंस्टीट्यूट के एक्सपर्ट्स पेरियार नदी के कई अहम पहलुओं की जांच करेंगे. इनमें पानी के बहाव की खासियत, बाढ़ के पैटर्न, नदी का मौसमी बिहेवियर, नेविगेशन की कंडीशन और दूसरे एनवायरनमेंटल फैक्टर्स शामिल हैं जो प्रोजेक्ट की कामयाबी पर असर डाल सकते हैं. इंस्टीट्यूट फील्ड जांच के दौरान सर्वे टीमों को टेक्निकल गाइडेंस भी देगा ताकि सही डेटा इकट्ठा किया जा सके और साइंटिफिक एनालिसिस हो सके.
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इसके नतीजों से KMRL को प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने से पहले संभावित इंजीनियरिंग चैलेंजेज, ऑपरेशन से जुड़ी जरूरतों और लंबे टाइम की सस्टेनेबिलिटी की पहचान करने में मदद मिलेगी. नतीजों के आधार पर, अधिकारी ये तय करेंगे कि क्या नए वॉटरवे को एक भरोसेमंद ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर के तौर पर डेवलप किया जा सकता है.
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कोच्चि बना मिसाल
कोच्चि पहले ही भारत के पहले ऐसे शहर के तौर पर पहचान बना चुका है जिसने वॉटर मेट्रो सिस्टम शुरू किया है; इसे इलेक्ट्रिक-हाइब्रिड फेरी का इस्तेमाल करके शहरी आवाजाही को बेहतर बनाने के लिए डिजाइन किया गया है. दिसंबर 2021 में 'मुजिरिस' नाम का पहला जहाज लॉन्च किया गया था, जो एक मॉडर्न और एनवायरनमेंट फ्रेंडली पब्लिक ट्रांसपोर्ट पहल की शुरुआत थी.
ट्रैफिक जाम से राहत
पूरे वॉटर मेट्रो प्रोजेक्ट में 15 प्रपोज्ड रूट शामिल हैं जो तकरीबन 78 किलोमीटर तक फैले हैं और 38 जेट्टी के नेटवर्क के जरिए 10 आइलैंड्स को जोड़ते हैं. उम्मीद है कि ये सर्विस रोड ट्रांसपोर्ट पर डिपेंडेंसी कम करेगी और साथ ही क्लीन और ज्यादा एफिशिएंट ट्रैवल ऑप्शन मुहैया करेगी.
आम लोगों को जबरदस्त फायदा
अगर एयरपोर्ट के लिए प्रपोज्ड रूट को मंजूरी मिल जाती है, तो इससे स्थानीय लोगों और सैलानियों, दोनों के लिए कनेक्टिविटी में काफी सुधार हो सकता है. पैसेंजर्स मेट्रो रेल और वॉटर ट्रांसपोर्ट के बीच आसानी से स्विच कर सकेंगे और बिजी रोड पर ट्रैफिक जाम से बच सकेंगे. सुविधा बढ़ाने के अलावा, ये प्रोजेक्ट कोच्चि में टिकाऊ परिवहन को मजबूत कर सकता है और एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए एक ज्यादा ग्रीन और एफिशिएंट सिस्टम के साथ शहर के बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर को सपोर्ट कर सकता है.
निष्कर्ष
अलुवा से कोचीन एयरपोर्ट तक प्रपोज्ड वॉटर मेट्रो रूट, कोच्चि के सस्टेनेबल और इंटिग्रेटेड पब्लिक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क बनाने के प्रयासों में एक और बड़ा कदम है. अगर फीजिबिलिटी स्टडी के नतीजे पॉजिटिव रहे, तो पैसेंजर्स जल्द ही मेट्रो और वॉटर ट्रांसपोर्ट को मिलाकर एयरपोर्ट तक तेज, एनवायरनमेंट फ्रेंडली और आरामदायक सफर का लुत्फ ले सकेंगे. इस पहल में सड़क पर ट्रैफिक कम करने, कनेक्टिविटी बेहतर करने और भारत में इनोवेटिव शहरी मोबिलिटी सॉल्यूशन में कोच्चि को एक मिसाल के तौर पर एस्टैबलिश करने की क्षमता है.