हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: CJP ProtestGyanesh KumarSIRBigg Boss 20

अब रेलवे की बेडशीट में AI कैमरा खोजेगा दाग-धब्बे, इन 3 डिवीजन में पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च

Indian Railways News: भारतीय रेलवे की की ट्रेनों में अक्सर गंदे और दागदार बेडरोल की शिकायत होती है, लेकिन अब मंत्रालय ने इस परेशानी को दूर करने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया है जिससे पैसेंजर्स को क्लीन लिनन मिल सके. अभी ये काम सिर्फ 3 डिविजन में ही शुरू हुआ है.

विज्ञापन
Indian Railways Bedsheet (AI Image)

मुख्य बिंदु

  • रेलवे की कुछ लॉन्ड्रीज में AI पर आधारित दाग पहचानने की सुविधा शुरू की गई.
  • पुणे, जयपुर और जोधपुर डिवीजन में इस पायलट प्रोजेक्ट को शुरू किया गया.
  • AI ऑटोमेटेड कैमरे धुले हुए लिनन पर दागों की जांच करते हैं.
  • AC बेडरोल में 2 चादरें, 1 तकिए का कवर और 1 तौलिया होता है.
  • 3,215 स्टेशंस और 13,409 कोचेज में CCTV लगाने की बात की गई है.

AI Stain Detection In Railway Bedsheet: भारतीय रेलवे ने एसी कोच में सफर करने वाले पैसेंजर्स को दिए जाने वाले बेड लिनन (चादर, तकिए का कवर वगैरह) की क्वालिटी बेहतर बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बेस्ड एक नया पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है. यह पहल सेंट्रल रेलवे के पुणे डिवीजन और नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे के जयपुर और जोधपुर डिवीजन में मौजूद मशीनीकृत रेलवे लॉन्ड्री में शुरू की गई है.

रेल मंत्री ने क्या कहा?

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद को बताया कि इस पायलट प्रोग्राम में AI-इनेबल्ड कैमरा सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है, जो धुले हुए बेड लिनन पर लगे दागों की अपने-आप पहचान कर लेते हैं. उम्मीद है कि इस टेक्नोलॉजी से क्वालिटी की जांच ज्यादा सटीक और एक कंसिस्टेंट होगी और इंसानों की तरफ से की जाने वाली जांच पर डिपेंडेंसी कम होगी.

विज्ञापन

AI कैमरा करेगा स्कैन

AI सिस्टम धुले हुए सामान को पैक करने और मुसाफिरों के इस्तेमाल के लिए भेजने से पहले स्कैन करता है. दाग वाले या ठीक से साफ न हुए लिनन की पहचान करके, ये टेक्नोलॉजी ये एनश्योर करती है कि AC कोच के पैसेंजर्स तक सिर्फ साफ और हाइजीनिक बेडरोल ही पहुंचे, जिससे ट्रैवल एक्सपीरिएंस बेहतर हो.

यह भी पढ़ें- भारत में 3,215 रेलवे स्टेशन पर CCTV कैमरे लगाने का ऐलान, 13409 कोच की सिक्योरिटी भी होगी टाइट

विज्ञापन

बेडरोल में क्या-क्या होता है?

एसी कोच में दिए जाने वाले हर स्टैंडर्ड बेडरोल में 2 बेड शीट, एक तकिए का कवर और एक हाथ पोंछने वाला तौलिया होता है. एक चादर कंबल के नीचे बिछाई जाती है ताकि पैसेंजर्स और कंबल के बीच साफ-सफाई की एक एडिशनल लेयर बनी रहे.

रेलवे की लॉन्ड्री में कैसे काम होता है?

भारतीय रेलवे अपनी मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री में पहले से ही क्वालिटी कंट्रोल के कई उपाय अपनाता है. इनमें धुले हुए लिनन की सफाई की जांच के लिए ‘व्हाइटनेस मीटर’ का इस्तेमाल शामिल है, जबकि CCTV कैमरे धुलाई और हैंडलिंग के कामों पर लगातार नजर रखते हैं. AI पर आधारित दाग पहचानने की सुविधा जुड़ने से इन क्वालिटी एश्योरेंस प्रक्रियाओं के और मजबूत होने की उम्मीद है.

विज्ञापन

यह भी पढ़ें- क्या ट्रेन के ऊपर सोलर पैनल लगाने से डिब्बे को मिल सकती है बिजली? जानिए इस तकनीक की क्या हैं चुनौतियां

कितने दिनों में चेंज होते हैं लिनन?

रेलवे नेटवर्क लिनन को बदलने की एक तय पॉलिसी का भी पालन करता है. तकिए के कवर और हाथ पोंछने वाले तौलिये आमतौर पर 9 महीने के इस्तेमाल के बाद बदल दिए जाते हैं, जबकि बेड शीट कपड़े के टाइप और उनकी हालत के आधार पर 12 से 24 महीने तक इस्तेमाल की जाती हैं, ताकि रेलवे के मेंटनेंस स्टैंडर्ड को फॉलो किया जा सके.

विज्ञापन

किस ट्रेन में ब्लैंकेट कवर की सुविधा?

AI पहल के अलावा, भारतीय रेलवे ने नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे की सेवाओं और कामाख्या और हावड़ा के बीच चलने वाली हाल ही में शुरू हुई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में AC पैसेंजर्स के लिए कंबल कवर का इस्तेमाल बढ़ाया है. सरकार ने देश भर के 3,215 रेलवे स्टेशनों और 13,409 पैसेंजर कोच में CCTV सर्विलांस सिस्टम लगाकर पैसेंजर्सी की सिक्योरिटी भी बढ़ाई है.

यह भी पढ़ें- Vande Bharat Sleeper: वंदेभारत स्लीपर की अगली ट्रेन को लॉन्च करने में क्यों हो रही देरी? सामने आई ये बड़ी वजह

विज्ञापन

निष्कर्ष

एआई-बेस्ड दाग पहचानने वाला पायलट प्रोजेक्ट, पैसेंजर्स के कंफर्ट और हाइजीन को बेहतर बनाने पर भारतीय रेलवे के लगातार ध्यान को दिखाता है. ऑटोमेटेड इंस्पेक्शन टेक्नोलॉजी और मौजूदा क्वालिटी कंट्रोल उपायों को मिलाकर, रेलवे का मकसद एसी कोचों में साफ लिनन अवेलेबल कराना है. लिनन को नियमित रूप से बदलना, एडवांस्ड मॉनिटरिंग सिस्टम और कंबल के कवर का ज्यादा इस्तेमाल सर्विस स्टैंडर्ड को और मजबूत करता है. अगर ये पायलट कामयाब रहता है, तो एआई-बेस्ड लिनन इंस्पेक्शन को और ज्यादा मेकेनाइज्ड रेलवे लॉन्ड्री में शुरू किया जा सकता है, जिससे लाखों पैसेंजर्स के लिए ट्रैवल की क्वालिटी बेहतर होगी.

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola