मुख्य बिंदु
- सरकार 10 नेशनल हाइवे कॉरिडोर पर हाइड्रोजन गाड़ियों का ट्रायल शुरू कर रही है.
- हाइड्रोजन को फ्यूचर के क्लीन ट्रांसपोर्ट फ्यूल के तौर पर बढ़ावा दिया जा रहा है.
- भारत को हर साल लगभग 3 लाख बसों की जरूरत होती है, लेकिन उत्पादन मांग से कम है.
- मंत्रालय इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए चार्जिंग का खर्च कम करने की योजना बना रहा है.
- भारत का ऑटोमोबाइल उद्योग ₹22 लाख करोड़ का हो गया है और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उद्योग बन गया है.
Hydrogen Transport On India's 10 Major Highways: केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर डिपेंडेंसी कम करने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए, हाइड्रोजन से चलने वाले वाहनों के इस्तेमाल को परखने के लिए 10 बड़े हाइवे कॉरिडोर पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए हैं. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गांधीनगर में 'प्रवास 5.0' और 'भारत प्रवास अवार्ड्स' को संबोधित करते हुए इस पहल का ऐलान किया.
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इन रूट्स पर चलेगी हाइड्रोजन बस
नितिन गडकरी के मुताबिक, इस पायलट प्रोग्राम का मकसद ट्रांसपोर्ट सेक्टर के लिए हाइड्रोजन को एक सस्टेनेबल ईंधन के तौर पर परखना है. चुने गए रूट्स में ग्रेटर नोएडा-दिल्ली-आगरा, अहमदाबाद-वडोदरा-सूरत, पुणे-मुंबई, भुवनेश्वर-कोणार्क-पुरी, साहिबाबाद-फरीदाबाद-दिल्ली, जमशेदपुर-कलिंग नगर, तिरुवनंतपुरम-कोच्चि, कोच्चि-एडप्पल्ली, जामनगर-अहमदाबाद और NH-16 पर विशाखापत्तनम-बय्यावारम शामिल हैं.
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हाइड्रोजन का यूज बढ़ाने का प्लान
गडकरी ने भरोसा जताया कि भविष्य में ट्रांसपोर्टेशन के लिए हाइड्रोजन ऊर्जा के सबसे अहम स्रोतों में से एक बनेगा. उन्होंने कहा कि सरकार ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में तकनीकी इनोवेशन को बढ़ावा देने के साथ-साथ क्लीन एनर्जी फ्यूल के इस्तेमाल को भी एनकरेज कर रही है. हाइड्रोजन के अलावा, भारत बायोफ्यूल और ऊर्जा के अन्य वैकल्पिक समाधानों के विकास में भी लगातार प्रगति कर रहा है.
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पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने पूरे देश में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के विस्तार पर जोर दिया. उन्होंने व्हीकल मैनुफैक्चरर से ऐसी बसें बनाने का गुजारिश की जिनमें आधुनिक तकनीक, यात्रियों के लिए आराम और किफायती दाम का तालमेल हो. मौजूदा मांग का जिक्र करते हुए गडकरी ने कहा कि भारत को हर साल लगभग 3 लाख बसों की जरूरत होती है, जबकि सालाना प्रोडक्शन 70,000 से 80,000 यूनिट के आसपास ही रहता है.
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'किफायती बने क्लीन ट्रांसपोर्टेशन'
उन्होंने इलेक्ट्रिक बस मैनुफैक्चरर को ये भी एनकरेज किया कि वो लिथियम-आयन बैटरी की घटती कीमतों का फायदा ग्राहकों तक पहुंचाएं. इसके अलावा, मंत्रालय इलेक्ट्रिक बसों, ट्रकों और पैसेंजर्स व्हीकल की चार्जिंग के लिए बिजली की लागत कम करने के उपायों पर भी काम कर रहा है, ताकि क्लीन ट्रांसपोर्टेशन ज्यादा किफायती बन सके.
(AI Image)
रोड सेफ्टी भी प्रायोरिटी
सड़क सुरक्षा भी सरकार की एक और बड़ी प्रायोरिटी है. गडकरी ने बताया कि भारत में हर साल तकरीबन 5 लाख सड़क हादसे हैं और करीब 1.8 लाख लोगों की मौत होती है. इन पीड़ितों में से एक बड़ा हिस्सा 18-36 एज ग्रुप का होता है, जबकि रोड एक्सिडेंट्स के कारण देश की GDP का तकरीबन 3 फीसदी आर्थिक नुकसान होता है.
भारत का ऑटोमोबाइल मार्केट कितना बड़ा?
बस बनाने वाले सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए, मंत्रालय ने गाड़ियों की टेस्टिंग का खर्च 50 फीसदी कम कर दिया है और मंजूरी मिलने का समय 16 हफ्ते से घटाकर 6 हफ्ते कर दिया है. गडकरी ने ये भी कहा कि भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री काफी बढ़ी है, जो 14 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 22 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जिससे देश दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार बन गया है.
निष्कर्ष
भारत का हाइड्रोजन ट्रांसपोर्ट पायलट प्रोग्राम साफ-सुथरे और टिकाऊ मोबिलिटी सॉल्यूशंस को लेकर सरकार के कमिटमेंट को दिखाता है. हाइड्रोजन, बायोफ्यूल और इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ, इस पहल का मकसद फॉसिल फ्यूल पर डिपेंडेंसी कम करना और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहतर बनाना है. ऑटोमोटिव और बस बनाने वाले सेक्टर में सुधार और सड़क सुरक्षा को मजबूत करने की कोशिशों से लंबे समय में आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. अगर हाइड्रोजन ट्रायल कामयाब होते हैं, तो वे पूरे देश में ज्यादा हरे-भरे और एनर्जी-एफिशिएंट ट्रांसपोर्ट नेटवर्क का रास्ता साफ कर सकते हैं.