सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने देश में ड्राइविंग लाइसेंस (DL) के नियमों में बड़े बदलाव करने का प्रस्ताव दिया है. सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स (Central Motor Vehicles Rules) में संशोधन के लिए यह ड्राफ्ट तैयार किया गया है. सरकार का मकसद ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया को आसान बनाना, सुरक्षा बढ़ाना और फर्जीवाड़े पर रोक लगाना है.
अगर आप भी नया ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की सोच रहे हैं या पुराने में कोई सुधार करवाना चाहते हैं, तो जानिये कि सरकार क्या नए नियम लाने जा रही है.
कौन-कौन से नियमों में हो रहे हैं बदलाव
भारतीय और विदेशी नागरिकों के लिए अलग-अलग कलर-कोडेड लाइसेंस
प्रस्ताव के मुताबिक, अब लाइसेंस अथॉरिटी से जारी या रिन्यू किए जाने वाले ड्राइविंग लाइसेंस लैमिनेटेड या PVC कार्ड (फॉर्म 7) के रूप में होंगे. सबसे बड़ा बदलाव यह है कि भारतीय नागरिकों और विदेशी नागरिकों के लिए अलग-अलग रंग और फॉर्मेट तय किए जाएंगे.
लाइसेंस पर दर्ज होंगी इमरजेंसी और मेडिकल जानकारी
नए नियमों के तहत अब ड्राइविंग लाइसेंस पर कुछ बेहद जरूरी जानकारियां भी प्रिंट होंगी, जैसे कि धारक का ब्लड ग्रुप, मोबाइल नंबर, आपातकालीन संपर्क नंबर. इससे किसी भी सड़क दुर्घटना या इमरजेंसी के वक्त घायल व्यक्ति की पहचान करने और उसके परिवार तक तुरंत सूचना पहुंचाने में बहुत मदद मिलेगी.
उम्र और पते के सबूत के लिए शपथ पत्र (Affidavit) की जरूरत खत्म
अब तक लाइसेंस के लिए आयु और पते के प्रमाण के तौर पर एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट या नोटरी से शपथ पत्र (Affidavit) बनवाना पड़ता था, जिसे अब हटाने का प्रस्ताव है. इसकी जगह आधार, पासपोर्ट, वोटर आईडी, ई-राशन कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों को मान्यता दी जाएगी. इससे फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल पर रोक लगेगी और कागजी कार्रवाई आसान होगी.
ड्राइविंग टेस्ट और ट्यूटोरियल हुआ सख्त
सुरक्षित ड्राइविंग को बढ़ावा देने के लिए टेस्ट के नियमों को कड़ा किया जा रहा है. जैसे कि सेफ-ड्राइविंग ट्यूटोरियल से जुड़े असेसमेंट में पास होने के लिए अब न्यूनतम स्कोर 60% से बढ़ाकर 75% कर दिया गया है. वहीं ट्यूटोरियल वीडियो या क्लास को कम से कम 30 मिनट तक देखना अनिवार्य होगा.
नाम या पता बदलवाना हुआ फ्री, 15 दिन में होगा काम
प्रस्ताव के मुताबिक, अगर लाइसेंस में नाम या पता जैसी कोई जानकारी बदलवानी है, तो इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा. अथॉरिटी को ऐसे आवेदन पर 15 दिनों के भीतर फैसला लेना होगा. यदि आवेदन खारिज होता है, तो उसकी वजह भी बतानी होगी. अगर आवेदक आधार ऑथेंटिकेशन का उपयोग करके ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करते हैं, तो कुछ चुनिंदा ऑनलाइन डीएल सेवाओं पर फीस माफ की जा सकती है.
अभी नियम लागू नहीं, जनता से मांगे गए सुझाव
यह अभी एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन (Draft Notification) है, जिसे मंत्रालय ने सार्वजनिक किया है. इस पर आम जनता और स्टेकहोल्डर्स से 30 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं. जनता की प्रतिक्रिया और समीक्षा के बाद ही फाइनल नियम लागू किए जाएंगे. तब तक पुराने नियमों के आधार पर ही लाइसेंस से जुड़े काम होते रहेंगे.
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