मुख्य बिंदु
- दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का लगभग 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है.
- राजस्थान में सिर्फ 12 किलोमीटर का कंस्ट्रक्शन वर्क बाकी है.
- मुकुंदरा हिल्स ट्विन टनल का 96 फीसदी काम पूरा हो चुका है.
- दारा घाटी से गुजरने में लगने वाला टाइम 40 मिनट से घटकर 5 मिनट रह जाएगा.
- पूरे एक्सप्रेसवे के दो साल के अंदर पूरा होने की उम्मीद है.
Mukundra Hills Twin Tunnel In Rajasthan: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पूरा होने के करीब है और 1,386 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट का तकरीबन 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है. दिल्ली और मुंबई के बीच फास्ट और बेहतर रोड कनेक्टिविटी देने के लिए बनाए जा रहे इस एक्सप्रेसवे का रास्ता हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र से होकर गुजरता है. अब तक इस बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में लगभग 1.10 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है.
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तकरीबन पूरा हुआ काम
इस प्रोजक्ट में राजस्थान में एक बड़ी अचीवमेंट हासिल हुई है, जहां कंस्ट्रक्शन वर्क तकरीबन पूरा हो चुका है. अधिकारियों ने बताया है कि राज्य में एक्सप्रेसवे के 373 किलोमीटर के हिस्से में अब सिर्फ 12 किलोमीटर का काम बाकी है. सवाई माधोपुर और बूंदी के बीच 'पैकेज 10' के तहत आने वाले इस बचे हुए हिस्से के 30 अगस्त तक पूरा होने की उम्मीद है, जिससे राजस्थान वाला हिस्सा लगभग पूरी तरह तैयार हो जाएगा.
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टनल 96% बनकर तैयार
इस प्रोजेक्ट की सबसे अहम इंजीनियरिंग अचीवमेंट्स में से एक कोटा के पास 'मुकुंदरा हिल्स ट्विन टनल' है. 8.3 किलोमीटर लंबी और 1914 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनी ये 8-लेन वाली टनल 96 फीसदी पूरी हो चुकी है. चालू होने के बाद, ये देश की सबसे लंबी और सबसे मॉडर्न हाईवे टनल में से एक बन जाएगी.
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सुरंग से सफर का वक्त होगा कम
टनल खुलने से दारा घाटी से होकर गुजरने वाले सफर में काफी सुधार होने की उम्मीद है. अभी इस हिस्से को पार करने में ड्राइवर्स को तकरीबन 40 मिनट लगते हैं, लेकिन नई टनल से ये सफर घटकर लगभग 5 मिनट का रह जाएगा. इस सुधार से जाम कम होने, ट्रैफिक का फ्लो बेहतर होने और ड्राइविंग एक्सपीरिएंस आसान होने की उम्मीद है.
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टनल में मॉडर्न फैसिलिटी
पैसेंजर्स की सेफ्टी के लिए टनल में मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर होगा, जिसमें मॉडर्न वेंटिलेशन सिस्टम, आग का पता लगाने और उसे बुझाने वाले टूल्स, चौबीसों घंटे CCTV निगरानी और इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) शामिल हैं. ये तकनीकें इमरजेंसी में तेजी से रिस्पॉन्ड करने और ट्रैफिक को सही से चलाने के लिए बनाई गई हैं.
कब तक पूरा होगा काम?
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के अगले 2 सालों में पूरी तरह से तैयार हो जाने की उम्मीद है. पूरा रूट चालू होने के बाद, दिल्ली और मुंबई के नरीमन पॉइंट के बीच सफर में तकरीबन 12 घंटे लगने की उम्मीद है, जिससे मौजूदा हाईवे की तुलना में ट्रैवल टाइम काफी कम हो जाएगा. इस एक्सप्रेसवे से बिजनेस, टूरिस्म, लॉजिस्टिक्स और रीजनल इकॉनमिक डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ पश्चिमी और उत्तरी भारत में रोड कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है.
निष्कर्ष
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे भारत के सबसे बड़े रोड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक है और तेजी से पूरा होने की ओर बढ़ रहा है. राजस्थान में बस एक छोटा सा हिस्सा और मुकुंदरा हिल्स ट्विन टनल का काम तकरीबन पूरा होने के साथ, इस प्रोजेक्ट से विकास को रफ्तार मिलने की उम्मीद है. एक बार चालू हो जाने पर, इससे ट्रैवल टाइम कम होगा, लॉजिस्टिक्स मजबूत होंगे, इकॉनमी को बढ़ावा मिलेगा और बड़े शहरों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी. मॉडर्न सेफ्टी सिस्टम और वर्ल्ड-क्लास इंजीनियरिंग इस एक्सप्रेसवे को भारत के हाईवे डेवलपमेंट में एक बड़ा लैंडमार्क बनाएंगे.