अगर आप दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (Delhi-Meerut Expressway) पर रोजाना सफर करते हैं, तो चालान से बचने के लिए अपनी गाड़ी के स्पीडोमीटर के साथ-साथ घड़ी की सुइयों पर भी नजर रखना शुरू कर दीजिए. सड़क हादसों को रोकने और ट्रैफिक जाम की समस्या को खत्म करने के लिए 15 अगस्त से इस एक्सप्रेसवे पर एक अनोखा और देश का पहला टाइम-बेस्ड स्पीड लिमिट (Variable Speed Limit) पायलट प्रोजेक्ट शुरू हो चुका है.
इस नए नियम के तहत अब दिन के अलग-अलग समय (Time Slots) पर गाड़ियों की रफ्तार तय की जाएगी. यानी जब ट्रैफिक कम होगा तो रफ्तार की इजाजत ज्यादा मिलेगी, और जब पिक-ऑवर्स में सड़कें व्यस्त होंगी तो रफ्तार घटा दी जाएगी. आइए समझते हैं कि एक्सप्रेसवे पर कब, किस समय और कितनी रफ्तार में गाड़ी चलानी होगी.
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दिल्ली के इस हिस्से पर लागू हुआ नियम
आईआईटी रुड़की (IIT Roorkee) और सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRRI) के वैज्ञानिकों ने 24 घंटे के ट्रैफिक डेटा का अध्ययन करने के बाद यह सिस्टम तैयार किया है. यह नया नियम शुरुआती चरण में अक्षरधाम से सराय काले खां के बीच लागू किया गया है. कारों और भारी कमर्शियल वाहनों (Heavy Vehicles) दोनों के लिए अलग-अलग समय पर अलग-अलग स्पीड तय की गई हैं.
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नोट: यात्रियों को भ्रम से बचाने के लिए एक्सप्रेसवे पर पुराने स्पीड लिमिट बोर्ड्स को ढक दिया गया है.
डिजिटल डिस्प्ले और हाई-टेक कैमरों से कटेगा चालान
एनएचएआई (NHAI) और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस मिलकर इस प्रोजेक्ट की निगरानी कर रहे हैं. अक्षरधाम मंदिर और पांडव नगर फुट ओवरब्रिज (FOB) के पास डिजिटल वेरिएबल स्पीड डिस्प्ले बोर्ड लगाए गए हैं, जो हर समय सही स्पीड लिमिट दिखाते रहेंगे.
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एक्सप्रेसवे पर विशेष स्पीड डिटेक्शन कैमरे लगाए जा रहे हैं. जैसे ही आपकी गाड़ी उस तय समय की तय स्पीड सीमा को पार करेगी, कैमरे तुरंत उसे डिटेक्ट करेंगे और आपका ई-चालान ऑटोमैटिकली कट जाएगा.
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3 महीने बाद समीक्षा करेगी टीम
रिसर्च टीम अगले तीन महीनों तक इस एक्सप्रेसवे से डेटा जुटाएगी और यह देखेगी कि क्या टाइम-बेस्ड स्पीड लिमिट से हादसों और ट्रैफिक जाम में वाकई कोई कमी आई है या नहीं. अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो इसे देश के अन्य बड़े एक्सप्रेसवे पर भी लागू किया जा सकता है.
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