अस्पताल के बढ़ते खर्चों के बीच एक मरीज की कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है. इस मरीज ने सिर्फ एक साधारण कदम उठाकर करीब 44,000 रुपये की बचत कर ली. यह मामला लोगों के लिए एक बड़ी सीख बनकर सामने आया है कि अगर आप अस्पताल का पूरा बिल ध्यान से जांचें, तो कई बार बड़ी गलती पकड़ में आ सकती है.

कैसे 1 लाख से 57 हजार हुआ बिल?

मरीज ने बताया, कि जनवरी में एक आउटपेशेंट प्रक्रिया के बाद उसे करीब 1 लाख रुपये का बिल दिया गया. पहले तो वह इसे भरने की सोच रहा था, लेकिन किसी की सलाह पर उसने itemised bill (विस्तृत बिल) मांग लिया. जब अस्पताल ने 6 पेज का पूरा बिल दिया, तो उसमें कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं. 31,430 रुपये का एनेस्थीसिया कंसल्टेशन चार्ज, जो हुआ ही नहीं था. दूसरा सप्लाई किट का डुप्लिकेट चार्ज.

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मरीज ने अस्पताल में की शिकायत

मरीज ने तुरंत अस्पताल के बिलिंग विभाग से संपर्क किया. मामला रिव्यू के लिए भेजा गया और करीब 2 हफ्तों बाद दोनों गलत चार्ज हटा दिए गए. इसके बाद बिल 1 लाख से घटकर 57,000 रुपये रह गया.

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मरीज ने बताया, 'मैंने बिलिंग डिपार्टमेंट को फोन किया और सच कहूं तो मुझे लगा था कि बहस होगी, लेकिन वहां की महिला काफी शांत थीं; उन्होंने कहा कि वे इसे रिव्यू के लिए मार्क कर देंगी. इसमें लगभग 2 हफ़्ते लगे और उन्होंने दोनों चार्ज हटा दिए; मेरा बिल $1,100 से घटकर $618 हो गया. इसके बाद मरीज ने बिल का पूरा भुगतान कर दिया.'

हालांकि, उन्होंने दूसरों को सलाह दी कि वे हमेशा बिल की विस्तृत जानकारी (itemised bill) मांगें, नहीं तो ऐसी गलती किसी की नजर में नहीं आती है.

ऐसा लगता है कि बिलिंग में गलतियां बहुत ज्यादा आम हैं और अस्पताल इसी बात पर निर्भर रहते हैं कि लोग बिल को ध्यान से नहीं देखेंगे. उन्हें फोन करें और एक 'आइटम-वाइज' बिल मांगें—सिर्फ उसका सारांश (summary) नहीं, बल्कि पूरा विस्तृत बिल. इसमें सिर्फ 5 मिनट लगेंगे, और हो सकता है कि आपको उसमें कुछ गड़बड़ मिल जाए.

'यह जान-बूझकर किया गया है'

जैसे ही यह पोस्ट वायरल हुई, सोशल मीडिया यूज़र्स ने यह बात नोट की कि अस्पताल अक्सर इस तरह के 'डार्क पैटर्न' (गुमराह करने वाले तरीके) अपनाते हैं और सरकारी निगरानी की कमी के कारण जवाबदेही से बच निकलते हैं.

'आप हमेशा आइटम-वाइज बिल मांगें, और देखें कि बिल 20 परसेंट कम हो जाता है,' एक यूज़र ने कहा, जबकि दूसरे ने कहा- 'अगर गलती हमेशा उनके फायदे में हो, तो वह गलती नहीं है. वह जान-बूझकर किया जाता है.'