Blood Woman: कश्मीर की ये महिला बनी मिसाल, 2012 से इतनी बार रक्तदान कर बचा चुकी है कईयों की जान, जानें

Bilkis Ara

Bilkis Ara

विज्ञापन

Blood Woman: कश्मीर के कुपवाड़ा जिले की रहने वाली 32 वर्षीय महिला बिलकीस आरा कईयों के लिए प्रेरणा स्त्रोत की भूमिका निभा रही हैं। दरअशल, एक मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा कार्यकर्ता) आरा बीते 10 वर्षों में 28 बार रक्तदान कर घाटी में एक मिसाल कायम कर चुकी हैं। उनकी इस उपलब्धि के चलते उन्हें ‘कश्मीर की ब्लड वुमन’ (Blood Woman) के रूप में भी जाना जाता है।

त्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले की हंदवाड़ा तहसील की रहने वाली बिलकीस ने कहा कि वह खून के महत्व को समझती हैं। समाचार एजेंसी एएनआई से हुई वार्ता में उन्होंने कहा, “मैं कश्मीर घाटी में कई मरीजों की जिंदगी बचाकर अपने आप को सौभाग्यशाली और गौरवान्वित महसूस कर रही हूं।” उन्होंने कहा, “मैंने लोगों को उनके प्रियजनों को बचाने के लिए खून लेने की कोशिश के दौरान बेबसी से रोते देखा है, लेकिन मुझे खुद पर गर्व है क्योंकि मैंने उनके लिए भी खून की व्यवस्था की है। उसके बाद मुझे एक आंतरिक खुशी महसूस हो रही थी।”

विज्ञापन

तीन बच्चों की मां बिलकीस (Blood Woman) ने कहा है कि एक बार अस्पताल में बीमार उनके बच्चे को खून की जरूरत थी और उन्होंने उस समय भी डोनेट किया था. उन्होंने कहा, “मैंने उत्तरी कश्मीर के लगभग हर अस्पताल में दुर्घटना पीड़ितों, गर्भवती महिलाओं और अन्य रोगियों सहित जरूरतमंदों को रक्तदान किया है, इसके अलावा, जब भी मुझे मौका मिलता, मैं श्रीनगर के अस्पतालों में रक्तदान करती।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं एक पंजीकृत रक्त दाता हूं, जब भी आवश्यकता होती है, हंदवाड़ा अस्पताल में ब्लड बैंक के अधिकारी मुझे बुलाते हैं और कम से कम समय में मैं रक्तदान करने के लिए खुद को उपलब्ध कराती हूं।” बिलकीस ने लोगों को सलाह देते हुए कहा कि लोगों को इसके लिए आगे आना चाहिए क्योंकि इससे आप मानसिक के साथ-साथ शारीरिक रूप से भी बेहतर महसूस करते हैं। वह अपने साथ-साथ अब तक सैकड़ों लोगों को रक्तदान करने के लिए प्रेरित करने के अलावा कई जगहों पर रक्तदान शिविर भी लगा चुकी हैं।

विज्ञापन

बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ग्लोबल डेटाबेस ऑन ब्लड सेफ्टी (जीडीबीएस) 2011 के अनुसार, भारत में 90 प्रतिशत रक्तदाता पुरुष थे और केवल 10 प्रतिशत महिलाएं थीं। डब्ल्यूएचओ ने पहले संकेत दिया था कि भारत ने 2007 में 3.6 मिलियन से 2008 में 4.6 मिलियन तक रक्तदाताओं में सबसे बड़ी वृद्धि दर्ज की। बाद के वर्षों के लिए कोई आंकड़े नहीं हैं।

विज्ञापन

भारत में, 18 वर्ष से अधिक आयु के किसी भी व्यक्ति को रक्तदान करने की अनुमति तब तक दी जाती है जब तक वे कुछ शारीरिक और स्वास्थ्य मानदंडों को पूरा करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जहां पुरुष हर तीन महीने में एक बार सुरक्षित रूप से रक्तदान कर सकते हैं, वहीं महिलाएं हर चार महीने में रक्तदान कर सकती हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिश है कि किसी देश की आबादी का 1 प्रतिशत दान उसकी रक्त की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त होगा। 2019 की एक रिपोर्ट द लैंसेट के एक अध्ययन का हवाला देती है जिसमें कहा गया है कि भारत ने 41 मिलियन यूनिट की कमी से जूझ रहा है, और यह कोविड से काफी पहले था।

विज्ञापन

डेटा से पता चलता है कि ऑस्ट्रेलिया, अजरबैजान, एस्टोनिया, जॉर्जिया, मोल्दोवा, मंगोलिया, न्यूजीलैंड, पुर्तगाल, स्वाज़ीलैंड और थाईलैंड सहित 25 देशों में महिलाएं 40 प्रतिशत से अधिक रक्तदान करती हैं।

विज्ञापन

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

/ताज़ा खबरें

विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ