पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के रुझान एक बड़े सियासी उलटफेर की ओर इशारा कर रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी बहुमत के जादुई आंकड़े को पार करती दिख रही है, जिससे ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस का एक दशक से ज्यादा पुराना शासन खत्म होने की कगार पर है. राज्य में पहले वामपंथ और फिर ममता के बड़े जनादेशों के बाद अब एक और नया अध्याय शुरू होने जा रहा है. रुझानों के मुताबिक बीजेपी 150 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बनाकर सरकार बनाने की मजबूत स्थिति में पहुंच गई है, जो बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत का संकेत है.

पश्चिम बंगाल में नए मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे कौन?

अगर मौजूदा रुझान जीत में बदलते हैं, तो शुभेंदु अधिकारी बीजेपी सरकार का चेहरा हो सकते हैं. अधिकारी का राजनीतिक सफर बंगाल की बदलती राजनीति की कहानी कहता है, क्योंकि वह कभी ममता बनर्जी के सबसे करीबी रणनीतिकारों में शामिल थे. नंदीग्राम आंदोलन के जरिए ममता को सत्ता तक पहुंचाने वाले अधिकारी ने 2020 में पाला बदलकर बीजेपी का दामन थाम लिया था. 2021 के चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम से खुद ममता बनर्जी को हराकर अपनी ताकत साबित की थी और अब वह विपक्ष के नेता के रूप में पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं.

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भवानीपुर में कांटे की टक्कर और वर्चस्व की लड़ाई

2026 के इस चुनाव में शुभेंदु और ममता की पुरानी प्रतिद्वंद्विता भवानीपुर सीट पर देखने को मिल रही है, जो ममता का अभेद्य किला माना जाता है. मतगणना के दौरान दोनों उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला चल रहा है और बढ़त का अंतर बार-बार बदल रहा है. एक समय पर ममता पिछड़ती दिखीं, तो अगले ही पल वह फिर आगे निकल गईं. यह उतार-चढ़ाव दिखाता है कि ममता के गढ़ में अब शुभेंदु ने बड़ी सेंध लगा दी है और कांटे की इस लड़ाई ने पूरे चुनाव को रोमांचक बना दिया है.

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बीजेपी के अन्य दावेदार और अधिकारी की मजबूती

शुभेंदु के अलावा दिलीप घोष, शमिक भट्टाचार्य और अग्निमित्रा पॉल जैसे नाम भी चर्चा में हैं, जो पार्टी के मजबूत स्तंभ रहे हैं. दिलीप घोष ने जहाँ संगठन को मजबूत किया, वहीं अग्निमित्रा पॉल जैसे युवा चेहरे बीजेपी की नई अपील का प्रतीक हैं. हालांकि बंगाल में पार्टी नेतृत्व को लेकर कोई बड़ा विवाद नजर नहीं आ रहा है और पूरा माहौल फिलहाल शुभेंदु अधिकारी के पक्ष में है. जिस तरह अधिकारी ने जमीन पर उतरकर रणनीति बनाई है, उसे देखते हुए ऐतिहासिक जीत की स्थिति में उनका मुख्यमंत्री बनना स्वाभाविक माना जा रहा है.

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