TMC Rebel MP: तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया के साथ गठबंधन करने वाले 20 सांसदों के खिलाफ अयोग्यता की कार्रवाई का मामला आगे बढ़ रहा है. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की तरफ से जारी नोटिस का जवाब देने की डेडलाइन 9 अक्टूबर को खत्म हो गई. इस बीच बागी सांसदों ने अपना पक्ष रखने के लिए 2 हफ्ते की और मोहलत मांगी है.
मीटिंग से नदारद हुए 10 सांसद
इसके बीच कोलकाता में बागी सांसदों की एक बैठक आयोजित की गई, लेकिन इसमें 20 में से सिर्फ 10 सदस्य ही पहुंचे. मीटिंग में शामिल नेताओं ने गैरमौजूद सांसदों को लेकर किसी तरह के मतभेद की अटकलों को खारिज किया. हालांकि यूसुफ पठान और सायोनी घोष जैसे बड़े नामों की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बन गई है.
मीटिंग में आधे सांसद क्यों नहीं पहुंचे?
सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने एक होटल में ये मीटिंग बुलाई थी. इसमें शामिल नेताओं के मुताबिक, कुछ सांसद विदेश में हैं, जबकि कुछ पारिवारिक कारणों और दूसरे कामों के चलते नहीं पहुंच सके. गैरमौजूद सदस्यों से फोन पर संपर्क करने की बात भी कही गई. सांसद शताब्दी रॉय ने कहा कि कौन बैठक में आया और कौन नहीं, इस पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत नहीं है. वहीं शर्मिला सरकार ने भी किसी तरह की गलतफहमी होने की बात से इनकार किया. रचना बनर्जी ने इस बैठक को दुर्गा पूजा से पहले आपसी मुलाकात का अवसर बताया. उन्होंने कहा कि संसद के सत्र के दौरान सांसदों की मुलाकात होती रहती है, लेकिन बंगाल लौटने के बाद सभी अपने-अपने क्षेत्र के कामों में बिजी हो जाते हैं.
मीटिंग में न आने वाले 10 सांसद कौन हैं?
- यूसुफ पठान
- सायोनी घोष
- जून मालिया
- काकोली घोष दस्तीदार
- माला रॉय
- कालीपद सोरेन
- पार्थ भौमिक
- मिताली बाग
- असीत माल
- देव
मीटिंग में मौजूद सांसद
सुदीप बंद्योपाध्याय के अलावा अबू ताहिर, खलीलुर रहमान, शर्मिला सरकार, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, शताब्दी रॉय, प्रसून बनर्जी, बापी हलदर, रचना बनर्जी और अरूप चक्रवर्ती टीएमसी के बागी सांसदों की मीटिंग में मौजूद रहे.
अयोग्यता का नोटिस क्यों जारी किया गया?
इन 20 सांसदों के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष अयोग्यता की अर्जी दाखिल की गई हैं. शिकायतों में उनके टीएमसी से अलग होने और NCPI के साथ गठबंधन करने को लेकर सवाल उठाए गए हैं. नोटिस के जरिए उनसे ये साफ करने को कहा गया है कि उनके खिलाफ दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए. इस मामले में TMC के ममता बनर्जी खेमे ने भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. अदालत की कार्यवाही के बाद लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय से सांसदों को जवाब देने के लिए नोटिस जारी किए गए थे.
डेडलाइन बढ़ाने की मांग
टीएमसी के बागी सांसदों ने सितंबर की शुरुआत में जवाब दाखिल करने के लिए 4 हफ्ते का वक्त मांगा था. हालांकि उन्हें सिर्फ 2 हफ्ते की मोहलत दी गई. अब डेडलाइन खत्म होने के बाद उन्होंने 2 सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा है. ये मांग मानी जाएगी या नहीं, इस पर आखिरी फैसला होना बाकी है. एक्सट्रा टाइम मिलने पर सांसदों को अपना पक्ष तैयार करने का मौका मिलेगा.
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