West Bengal OBC Reservation: पश्चिम बंगाल की राजनीति और आरक्षण नीति को लेकर एक बेहद बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण ढांचे में एक ऐतिहासिक और बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। राज्य सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा की गई है कि अब बंगाल में कुल ओबीसी आरक्षण को घटाकर 7 प्रतिशत पर सीमित रखा जाएगा। सरकार का यह बड़ा कदम कलकत्ता हाईकोर्ट के उस पुराने फैसले के अनुपालन में उठाया गया है, जिसने राज्य में आरक्षण की दिशा बदल दी थी।

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दरअसल, यह पूरा मामला कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें अदालत ने पूर्व में वर्ष 2010 के बाद जारी किए गए सभी ओबीसी प्रमाणपत्रों (OBC Certificates) को अवैध मानते हुए रद्द कर दिया था। अदालत का कहना था कि आरक्षण सूची में जातियों को शामिल करने की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई थी। अब सरकार ने इसी अदालती आदेश को लागू करते हुए ओबीसी कोटे का दायरा सीमित कर दिया है।

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कॉलेज एडमिशन पर सीधा असर

सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा और तुरंत असर राज्य के युवाओं और छात्रों पर पड़ने जा रहा है। आगामी सत्र में पश्चिम बंगाल के सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में होने वाली दाखिला प्रक्रिया अब इसी नई नीति के तहत होगी। यानी अब छात्रों को केवल 7 फीसदी ओबीसी कोटे के आधार पर ही एडमिशन मिल सकेगा। इस फैसले के बाद राज्य में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। जहां एक तरफ प्रशासन इसे अदालत के फैसले का कानूनी अनुपालन बता रहा है,

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वहीं दूसरी तरफ इस फैसले से उन लाखों युवाओं पर सीधा असर पड़ेगा जो उच्च शिक्षा में आरक्षण के भरोसे दाखिले की उम्मीद लगाए बैठे थे। सरकार के इस कदम के बाद अब आने वाले दिनों में शैक्षणिक संस्थानों में एडमिशन के नए नियम और दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।

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