पश्चिम बंगाल में बंपर वोटिंग के क्या मायने? 15 साल पहले प्रदेश में दिखा था बड़ा बदलाव

Explained West Bengal Election bumber Voting: पश्चिम बंगाल में टूटा वोटिंग का महा-रिकॉर्ड! 92.6% मतदान ने उड़ाए दिग्गजों के होश. क्या 2011 की तरह फिर दिख सकता है सत्ता में बड़ा बदलाव? जानें इस भारी वोटिंग के पीछे का असली खेल.

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Explained West Bengal Election bumber Voting: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में लोकतंत्र की ऐसी लहर देखने को मिली, जिसने इतिहास के सारे पन्ने पलट दिए हैं. 152 सीटों पर हुए मतदान में करीब 92.6% वोटिंग दर्ज की गई है. यह आंकड़ा न केवल अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है, बल्कि इसने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है. विश्लेषकों के मन में अब सिर्फ एक ही सवाल है, क्या यह भारी मतदान 2011 की तरह किसी बड़े उलटफेर का इशारा है? 2011 की यादें हुईं ताजा इतिहास गवाह है कि जब-जब बंगाल में बंपर वोटिंग हुई है, तब-तब सत्ता की कुर्सी हिली है. साल 2011 में जब 85.55% मतदान हुआ था, तब 34 साल पुरानी लेफ्ट सरकार की विदाई हुई थी और ममता बनर्जी ने ‘परिवर्तन’ का आगाज किया था. इस बार का आंकड़ा तो उस रिकॉर्ड से भी कहीं आगे निकल गया है.

महिलाओं का जोश और छिटपुट हिंसा

कुल 3.60 करोड़ मतदाताओं में से करीब 1.75 करोड़ महिला वोटरों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. लंबी कतारों में महिलाओं की यह भागीदारी लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाती है. हालांकि, मतदान के उत्साह के बीच हिंसा का साया भी रहा. बीरभूम के दुबराजपुर में जवानों पर पत्थरबाजी हुई, तो दक्षिण दिनाजपुर और मुर्शिदाबाद में उम्मीदवारों पर हमले की खबरें आईं.

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चुनाव आयोग भी रहा सक्रिय

चुनाव आयोग की चाक-चौबंद तैयारी चुनाव को निष्पक्ष बनाने के लिए आयोग ने कोई कसर नहीं छोड़ी.

  • 100% वेबकास्टिंग और AI आधारित निगरानी की गई.
  • सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की 2,450 कंपनियां तैनात रहीं.
  • 8,000 से ज्यादा बूथों को अति संवेदनशील घोषित किया गया था.

इन जिलों में रहा सबसे ज्यादा क्रेज

वोटिंग के मामले में दक्षिण दिनाजपुर सबसे आगे रहा. इसके बाद कूचबिहार, बीरभूम, मुर्शिदाबाद और झाड़ग्राम जैसे जिलों में मतदाताओं का भारी हुजूम उमड़ा. नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी और बहरामपुर में अधीर रंजन चौधरी जैसे दिग्गजों की साख दांव पर लगी है.

बदलाव या सत्ता की वापसी?

आमतौर पर भारी मतदान को ‘एंटी-इंकम्बेंसी’ या सत्ता विरोधी लहर से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन यह सरकार के पक्ष में मजबूती का संकेत भी हो सकता है. फिलहाल, 92.6% की इस वोटिंग ने यह साफ कर दिया है कि बंगाल की जनता खामोश नहीं है. वह अपने वोट की ताकत को बखूबी पहचानती है. अब देखना यह है कि यह रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग किस दल का राज्याभिषेक करती है.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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