TMC Rebel MPs Meet Bhupender Yadav: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बहुत बड़ा भूचाल आ गया है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही अंदरूनी कलह अब पूरी तरह से खुलकर देश के सामने आ चुकी है. रविवार को टीएमसी के कई बड़े और दिग्गज सांसद अचानक दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कद्दावर नेता और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के सरकारी आवास पर जा पहुंचे. पार्टी के भीतर बागी रुख अख्तियार कर चुके ये तमाम सांसद भूपेंद्र यादव के घर पर करीब दो घंटे तक रुके. इस बेहद गोपनीय और हाई-प्रोफाइल बैठक के सामने आने के बाद से ही पूरे देश के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है. सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में बागी सांसदों ने आगे की रणनीति को लेकर लंबी चर्चा की है, जिससे बंगाल से लेकर दिल्ली तक की राजनीति गरमा गई है.
घमंड और अत्याचार से बर्बाद हुई पार्टी: शुभेंदु अधिकारी
टीएमसी के कुनबे में मची इस भारी भगदड़ और सियासी संकट पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भी अपनी बड़ी प्रतिक्रिया दी है. पूरे घटनाक्रम पर तीखा तंज कसते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि अपने घमंड और जनता पर किए गए अत्याचार की वजह से ही आज यह पार्टी इस तरह से बर्बादी के रास्ते पर आकर खड़ी हो गई है.
अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर को लिखा पत्र
दूसरी तरफ, अपनी पार्टी में लगी इस सियासी आग को बुझाने और बागी सांसदों के मंसूबों को नाकाम करने के लिए टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने मोर्चा संभाल लिया है. अभिषेक बनर्जी ने इस पूरे घटनाक्रम को बेहद गंभीरता से लेते हुए तुरंत लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक पत्र लिखा है. इस पत्र के जरिए उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से मांग की है कि वे किसी भी तरह के अलग धड़े या बागी गुट को मान्यता न दें. अब देखना बेहद दिलचस्प होगा कि देश की राजनीति को हिलाकर रख देने वाले इस मामले में लोकसभा स्पीकर आगे क्या कदम उठाते हैं.
‘नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी’ के साथ मर्जर की चर्चा
राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि ये बागी सांसद किसी क्षेत्रीय पार्टी के साथ अपनी नई पारी शुरू कर सकते हैं. सूत्रों का दावा है कि ये बागी नेता ‘नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी’ के साथ मर्जर कर सकते हैं. इतना ही नहीं, मर्जर के बाद यह नया राजनीतिक समीकरण सीधे तौर पर एनडीए (NDA) को समर्थन देने की रणनीति पर काम कर सकता है. अगर ऐसा होता है, तो यह ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के लिए एक बहुत बड़ा झटका साबित होगा.
क्या है बगावत की असली वजह?
तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल की सबसे ताकतवर पार्टियों में गिनी जाती रही है, जिसकी कमान ममता बनर्जी के हाथों में है. लेकिन पिछले कुछ समय से पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था. सूत्रों की मानें तो पार्टी के कई नेता काफी समय से नाराज चल रहे थे. वे पार्टी की कार्यशैली, संगठन के फैसलों और कामकाज के तरीकों से संतुष्ट नहीं थे. विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद असंतोष का यह गुब्बारा फूट पड़ा है. चुनाव के नतीजों ने पार्टी के अंदर की कलह को पूरी तरह से सतह पर ला दिया है. नेताओं का मानना है कि पार्टी की दिशा सही नहीं है, जिसके चलते वे अब बगावत का झंडा उठाकर अलग रास्ता चुनने को मजबूर हैं. फिलहाल, इस घटनाक्रम ने ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.
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