Taslima Nasrin: बांग्लादेशी मूल की लेखिका तस्लीमा नसरीन ने बांग्लादेश के राजनीतिक और सामाजिक माहौल पर अपनी मजबूत राय दी है. उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की वापसी की अपील की है, साथ ही एक सेक्युलर देश और यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की वकालत की है. उन्होंने धार्मिक कट्टरपंथ के बढ़ते असर पर भी चिंता जताई और देश में मदरसों की भूमिका की आलोचना की.
मदरसों को बंद करने की मांग
नसरीन ने तर्क दिया कि बांग्लादेश को धर्म को शासन से अलग रखना चाहिए, और कहा कि एक सच्चे सेक्युलर देश के लिए ये जरूरी है कि देश धार्मिक संस्थाओं से आजाद रहे. उन्होंने दावा किया कि कई मदरसे कट्टरपंथी गतिविधियों से जुड़े रहे हैं और जिहादी पैदा करते हैं और समाज में उनके योगदान पर सवाल उठाया, और कहा कि इसके बजाय मॉडर्न शिक्षा पर ज्यादा जोर दिया जाना चाहिए, इन मदरसों को बंद करना चाहिए. उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कुछ मस्जिदें कट्टरपंथ का केंद्र बन गई हैं और कहा कि अधिकारियों को ऐसी संस्थाओं पर ज्यादा बारीकी से नजर रखनी चाहिए. नसरीन के अनुसार, देश की लंबे समय की तरक्की के लिए सेक्युलर वैल्यूज को मजबूत करना जरूरी है.
‘बांग्लादेश में बढ़ रहा कट्टरपंथ’
बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए, नसरीन ने कहा कि उनका मानना है कि कट्टरपंथी ग्रुप्स का असर कम होने के बजाय बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि अगर मौजूदा राजनीतिक हालात के बजाय अवामी लीग मुख्य विपक्ष बनी रहती तो बेहतर होता. उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछली और मौजूदा सरकारों में बहुत कम फर्क है, और आरोप लगाया कि धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं को लगातार जुल्म का सामना करना पड़ रहा है.
‘दूसरे धर्मों के साथ भेदभाव’
तस्लीमा नसरीन ने आगे कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं, बौद्धों और ईसाइयों के साथ भेदभाव होता है और उन्होंने धार्मिक संस्थानों को बढ़ाने के बजाय बेहतर शिक्षा की मांग की. उन्होंने चिन्मय कृष्ण दास के मामले का भी जिक्र किया और कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर बार-बार विरोध किया है.
UCC की मांग क्यों?
तस्लीमा ने भारतीय उपमहाद्वीप में यूनिफॉर्म सिविल कोड की अपनी लंबे समय से चली आ रही मांग को दोहराया, और तर्क दिया कि धर्म पर आधारित पर्सनल लॉ अक्सर महिलाओं के साथ भेदभाव करते हैं. उन्होंने कहा कि अलग-अलग धार्मिक कानूनों के बजाय एक कॉमन सिविल फ्रेमवर्क के जरिए विरासत के बराबर अधिकार, तलाक से सुरक्षा और जेंडर इक्वालिटी की गारंटी दी जानी चाहिए.
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