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शर्मिष्ठा पनोली के खिलाफ FIR दर्ज कराने वाले वजाहत खान को मिली राहत, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनोली के खिलाफ हेट स्पीच केस में एफआईआर दर्ज कराने वाले वजाहत खान की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर दिया है। कोर्ट ने पश्चिम बंगाल को छोड़कर अन्य राज्यों में गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई है। वजाहत खान के खिलाफ असम, बंगाल, महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली में केस दर्ज हैं।

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शर्मिष्ठा पनोली और वजाहत खान (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनोली के खिलाफ हेट स्पीच के केस में FIR दर्ज कराने वाले वजाहत खान की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के अलावा दूसरे राज्यों में गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई है।

सुप्रीम कोर्ट 14 जुलाई को वजाहत खान की याचिका पर सुनवाई करेगा। इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार समेत 6 राज्यों को नोटिस जारी किया है। वजाहत खान के खिलाफ असम, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली में FIR दर्ज की गई हैं।

क्यों दर्ज हुई है वजाहत पर FIR?

बता दें कि फिलहाल वजाहत खान पश्चिम बंगाल पुलिस की गिरफ्त में है। धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में वजाहत खान के खिलाफ 6 राज्यों में केस दर्ज किए गए हैं। वजाहत खान पर धार्मिक भावनाएं भड़काने और नफरत फैलाने वाली सामग्री को सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के आरोप में FIR दर्ज करवाई गई है।

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कोलकाता पुलिस ने 10 जून को वजाहत खान को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद से वह पुलिस कस्टडी में है। वजाहत खान ने असम, बंगाल, महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली में दर्ज FIR को एक साथ जोड़ने की मांग की है। वजाहत के वकील की तरफ से कोर्ट में दलील दी गई कि मैंने माफी भी मांगी और पोस्ट भी डिलीट कर दिया। मेरे खिलाफ सिर कलम करने की धमकियां दी जा रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने वजाहत खान को नसीहत देते हुए तमिल की एक कहावत का जिक्र करते हुए कहा कि आग से जला हुआ घाव सही हो सकता है, लेकिन शब्दों से किया घाव नहीं भरता।

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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को भेजा नोटिस

लाइव लॉ के मुताबिक, मामले की सुनवाई कर रही पीठ ने कहा कि याचिका पर केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी किया गया है, जिसका जवाब 14 जुलाई को देना है। पीठ ने आदेश दिया कि अन्य राज्यों में दर्ज एफआईआर या भविष्य में इसी आरोप पर दर्ज की जाने वाली किसी भी अन्य FIR के संबंध में याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए।

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