Rebel TMC Leader Claims Joining BJP: तृणमूल कांग्रेस के बागी नेता और कूच बिहार के सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने सोमवार, 14 सितंबर 2026 को दावा किया कि नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) से जुड़े 20 बागी लोकसभा सांसदों में से 17 दुर्गा पूजा के आसपास बीजेपी में शामिल हो जाएंगे. हालांकि उनके कई साथी बागियों ने तुरंत उनके बयान का खंडन किया, जबकि भाजपा ने कहा कि उसे ऐसे किसी प्लान के बारे में कोई जानकारी नहीं है. बसुनिया ने कहा कि 17 सांसद सामूहिक रूप से बीजेपी में शामिल होने पर सहमत हो गए हैं और तर्क दिया कि उनकी संख्या दलबदल विरोधी कानून के तहत दो-तिहाई की जरूरत को पूरा करेगी.

20 सांसदों को लेकर विवाद

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद बागी सांसद NCPI के साथ जुड़े. इसके बाद BJP की लीडरशिप वाले NDA गठबंधन को समर्थन देने का ऐलान किया. गौरतलब है कि पहले ये 20 सांसद TMC के 27 लोकसभा सदस्यों में शामिल थे. बागी गुट का कहना है कि उनका ये कदम एक वैलिड विलय है. बसुनिया ने कहा कि सांसदों ने शुरू में सीधे बीजेपी में शामिल होने पर विचार किया था, लेकिन बाद में NCPI का ऑप्शन चुना क्योंकि अल्पसंख्यक समुदाय के 3 सांसद भाजपा में शामिल होना नहीं चाहते थे.

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टीएमसी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष इस कदम को चुनौती दी है और इन 20 सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की है. लोकसभा सचिवालय ने 26 अगस्त को उन्हें नोटिस जारी किए थे. उनके की तरफ से एक्सट्रा टाइम मांगे जाने के बाद, जवाब देने की समय-सीमा 22 सितंबर तक बढ़ा दी गई थी.

बागी सांसदों ने खबरों से किया इनकार

बागी सांसद शताब्दी रॉय ने कहा कि बसुनिया ने अपनी निजी हैसियत से बात की है और कोई मिलकर फैसला नहीं लिया गया है. अबू ताहिर खान ने भी इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि बसुनिया के पास सभी NCPI सदस्यों की ओर से बोलने का कोई अधिकार नहीं है. उन्होंने खास तौर से इस बात से इनकार किया कि वो, खलीलुर् रहमान और यूसुफ पठान औपचारिक रूप से बीजेपी की सदस्यता लिए बिना, बाहर से NDA का समर्थन करेंगे.

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BJP ने दूरी बनाए रखी

भारतीय जनता पार्टी ने भी बसुनिया के दावे का समर्थन करने से इनकार कर दिया. पश्चिम बंगाल बीजेपी चीफ सामिक भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी सिर्फ इसलिए लोगों को स्वीकार नहीं करेगी क्योंकि वो शामिल होना चाहते हैं. चूंकि लोकसभा अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट अभी भी इन 20 सांसदों के स्टेटस की जांच कर रहे हैं, इसलिए बागी गुट का राजनीतिक भविष्य अनिश्चित बना हुआ है.

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