बंगाल चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हार के बाद पार्टी के भीतर हलचल जारी है. टीएमसी सांसद काकोली घोष ने खुलकर असंतोष जताना शुरू कर दिया है, जबकि टीएमसी के नगर निकायों में चल रही अंदरूनी कलह की वजह से सामूहिक इस्तीफों का दौर शुरू हो गया है. इस बीच मंगलवार को काकोली समेत पार्टी के छह विधायकों ने बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक समीक्षा बैठक में हिस्सा लिया. बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में ममता बनर्जी की करारी हार के बाद टीएमसी में इस सियासी भूचाल के कई मायने निकाले जा रहे हैं.

खुलकर सामने आई अंदरूनी कलह


काकोली ने हाल ही में जिला अपश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदरूनी कलह ने अब खुला रूप ले लिया है. पार्टी के 100 से ज्यादा पार्षद इस्तीफा दे चुके हैं, वहीं बारासात सांसद काकोली घोष ने खुलकर असंतोष जताते हुए जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मंगलवार को काकोली घोष समेत TMC के छह विधायकों ने भाजपा शासित राज्य सरकार की प्रशासनिक समीक्षा बैठक में हिस्सा लिया.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें: बेंगलुरु-चेन्नई IndiGo फ्लाइट में धुआं, टेकऑफ से पहले इमरजेंसी इवैक्यूएशन; मचा हड़कंप

---विज्ञापन---

शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी में हुई बैठक


इस बैठक में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी में उत्तर 24 परगना, नदिया और हुगली जिलों के अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए. काकोली घोष के अलावा देगंगा से अनीसुर रहमान बिस्वास, स्वरूपनगर से बीना मंडल, हरोआ से मोहम्मद अब्दुल मतीन और बसीरहाट क्षेत्र के अन्य विधायक भी इस बैठक में पहुंचे. भाजपा सूत्रों के मुताबिक, बैठक मुख्य रूप से विकास कार्यों और प्रशासनिक समीक्षा पर केंद्रित थी. हालांकि TMC नेताओं की इस बैठक में मौजूदगी को राजनीतिक गलियारों में बड़े सियासी संकेत के रूप में देखा जा रहा है.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें: ममता बनर्जी के खिलाफ दर्ज हुई FIR, ईद के कार्यक्रम में ऐसा क्या बोल गईं दीदी?

---विज्ञापन---

काकोली घोष ने जताई थी नाराजगी


काकोली घोष ने हाल ही में संसदीय दल की मुख्य सचेतक पद से हटाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर नाराजगी जताई थी. उन्होंने लिखा था, 'चार दशक की वफादारी का यह इनाम मिला.' उधर, बैठक के बाद बीना मंडल ने पत्रकारों से कहा, 'मैं अपने क्षेत्र के विकास के लिए आई हूं. हम विकास के मुद्दों पर चर्चा करने गए थे.' मोहम्मद अब्दुल मतीन ने भी यही रुख अपनाते हुए कहा कि राज्य सरकार का निमंत्रण मिलने पर वे विधायक के नाते शामिल हुए.

---विज्ञापन---

शुभेंदु अधिकारी ने इस घटनाक्रम को पश्चिम बंगाल की नई राजनीतिक संस्कृति बताया. उन्होंने कहा, 'जब हम विपक्ष में थे तब हमें कभी प्रशासनिक बैठकों में नहीं बुलाया जाता था. हमने फैसला किया है कि सभी विधायकों को विकास कार्यों के लिए आमंत्रित किया जाएगा, चाहे वे किसी भी दल से हों.'