पश्चिम बंगाल में वोटिंग का समय पास आते आते सियासत दिलचस्प होती जा रही है। 23 अप्रैल को पहले चरण की वोटिंग से पहले ओवैसी और हुमायूं कबीर का गठबंधन टूट गया है। AIMIM ने एक्स पोस्ट करके इसकी जानकारी दी। यह गठबंधन बंगाल के लिए अहम माना जा रहा था। हुमायूं कबीर के कथित वीडियो वायरल होने के बाद ओवैसी ने यह फैसला लिया है। अब AIMIM ने बंगाल में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने ट्वीट किया कि हुमायूं कबीर के खुलासों ने बंगाल के मुसलमानों की असुरक्षा को उजागर किया है। AIMIM ऐसे किसी भी बयान से खुद को नहीं जोड़ सकती जिससे मुसलमानों की गरिमा पर सवाल उठे। आज से AIMIM ने कबीर की पार्टी से अपना गठबंधन वापस ले लिया है।

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पोस्ट में लिखा कि बंगाल के मुसलमान सबसे गरीब, उपेक्षित और शोषित समुदायों में से एक हैं। दशकों के धर्मनिरपेक्ष शासन के बावजूद उनके लिए कुछ नहीं किया गया है। किसी भी राज्य में चुनाव लड़ने के संबंध में AIMIM की नीति यही है कि हाशिए पर पड़े समुदायों को एक स्वतंत्र राजनीतिक आवाज मिले। हम बंगाल चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ेंगे और आगे किसी भी पार्टी के साथ हमारा कोई गठबंधन नहीं होगा।

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पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM की नजर मुस्लिम वोटों पर है। ओवैसी ने बंगाल में 20 रैलियां करने की योजना बनाई है, जिसमें हुमायूं कबीर भी उनके साथ होंगे। बंगाल में ओवैसी के M-फॉर्मूले को लेकर काफी चर्चा है, जिसमें मुस्लिम, दलित और पिछड़े वर्गों को एकजुट करने की बात कही गई है। हालांकि, बीजेपी नेता गिरिराज सिंह ने ओवैसी के बंगाल दौरे को 'गजवा-ए-हिंद' बनाने की कोशिश बताया है। पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए मतदान 23 अप्रैल 2026 को होगा, जबकि नतीजे 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे।