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बंगाल चुनाव में अर्धसैनिक बलों के हाथ में नहीं होगी बंदूक, लाठी लेकर करेंगे ड्यूटी; फोर्स ने किया कड़ा विरोध

देश में पश्चिम बंगाल और असम का विधानसभा चुनाव हमेशा से ही सुर्खियों में रहता है. चुनाव के दौरान या फिर प्रचार के दौरान किसी ना किसी जिले से हिंसा की खबर आ ही जाती है. साल 2021 में पश्चिम बंगाल विधानसभा का चुनाव 8 चरणों में पूरा किया गया था. लगभग 35 सालों के बाद चुनाव आयोग ने बंगाल चुनाव के लिए सबसे बड़ा बदलाव करते हुए विधानसभा का चुनाव सिर्फ 2 चरणों में पूरा करने का निर्णय लिया है. सिर्फ चुनाव को लेकर निर्णय ही नहीं वहां की सुरक्षा और सुरक्षा में कितने लेयर होंगे इस पर भी सबसे बड़ा बदलाव किया गया है.

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देश में पश्चिम बंगाल और असम का विधानसभा चुनाव हमेशा से ही सुर्खियों में रहता है. चुनाव के दौरान या फिर प्रचार के दौरान किसी ना किसी जिले से हिंसा की खबर आ ही जाती है. साल 2021 में पश्चिम बंगाल विधानसभा का चुनाव 8 चरणों में पूरा किया गया था. लगभग 35 सालों के बाद चुनाव आयोग ने बंगाल चुनाव के लिए सबसे बड़ा बदलाव करते हुए विधानसभा का चुनाव सिर्फ 2 चरणों में पूरा करने का निर्णय लिया है. सिर्फ चुनाव को लेकर निर्णय ही नहीं वहां की सुरक्षा और सुरक्षा में कितने लेयर होंगे इस पर भी सबसे बड़ा बदलाव किया गया है.

पैरामिलिट्री फोर्स की सबसे बड़ी तैनाती भी यहां पर की जा रही है. बकायदा इसके लिए एक रोडमैप भी तैयार किया गया है. न्यूज 24 को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस बार के बंगाल चुनाव में 500 से ज्यादा कंपनियों को प्रदेश में चुनाव के दौरान तैनात किया जाएगा. लेकिन इसी बीच एक तुगलकी फरमान बीएसएफ के डीजी की तरफ से जारी कर दिया गया है.

आदेश के मुताबिक बीएसएफ के जवान से लेकर अधिकारी चुनावी ड्यूटी के दौरान हथियार से लैस रहने की बजाए लाठी लेकर पेट्रोलिंग करेगें. अब इस आदेश को लेकर जवान से लेकर अफसर तक चिंता जाहिर कर रहे हैं. क्योंकि पश्चिम बंगाल के 2021 के चुनाव में कई स्थानों पर हिंसा हुई थी. असम में भी कई ऐसे इलाके हैं, जो विधानसभा चुनाव के लिहाज से अति संवेदनशील माने जाते हैं. पश्चिम बंगाल और असम में कई इलाके संवेदनशील हैं. ऐसे में केवल लाठी रखना, क्या ये निर्णय जवानों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है.

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इस मुद्दे को लेकर दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई जिसमें अर्धसैनिक बल के पूर्व अधिकारियों ने बताया कि ग्राउंड जीरों पर कोई अधिकारी आज तक गया ही नहीं है तो उसे माहौल की जानकारी कैसे रहेगी. अगर किसी भी तरह का हमला उपद्रवियों की तरफ से कर दिया गया तो क्या जवान से लेकर अफसर उसका मुकाबला सिर्फ लाठी से कर पाएंगे.

न्यूज 24 से एक्सक्लूसिव बातचीत में रिटायर्ड आईजी कमल शर्मा ने कहा कि इस आदेश को तुरंत वापस लेना चाहिए. आपको बता दें कि न्यूज 24 से बातचीत में बीएसएफ के ग्राउंड अधिकारियों ने इस आदेश का समर्थन नहीं किया. सूत्रों ने बताया कि ये आदेश, बीएसएफ जवानों और अफसरों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने जैसा है. बीएसएफ अफसरों का कहना है कि पश्चिम बंगाल और असम के संवेदनशील इलाकों में चुनावी ड्यूटी, बिना हथियार कैसे संभव है.

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