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₹2672 करोड़ की धोखाधड़ी मामले में ED की बड़ी कार्रवाई, आरोपी प्रत्युष कुमार सुरेका गिरफ्तार

05 जनवरी को लुक आउट सर्कुलर के आधार पर उसे कोलकाता एयरपोर्ट पर थाईलैंड जाने की कोशिश करते समय रोका गया. जांच में असहयोग, साक्ष्य नष्ट करने की आशंका, फरार होने के जोखिम को देखते हुए प्रत्युष की गिरफ्तारी की गई. पढ़िये पश्चिम बंगाल से प्रशांत देव की रिपोर्ट.

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प्रवर्तन निदेशालय (ED) एम/एस गणेश ज्वैलरी हाउस (इंडिया) लिमिटेड से जुड़े बहुचर्चित बैंक धोखाधड़ी मामले में कोलकाता के ही निवासी आरोपी प्रत्युष कुमार सुरेका को गिरफ्तार किया. 16 जनवरी को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 19(1) के तहत प्रत्युष कुमार को गिरफ्तार किया गया है.

₹2,672 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला


ED ने यह जांच सीबीआई, बैंक फ्रॉड एवं फाइनेंशियल सिक्योरिटीज, कोलकाता द्वारा दर्ज एफआईआर संख्या RC BSK 2016 E 0005 दिनांक 12 जुलाई, 2016 के आधार पर शुरू की थी. जांच में सामने आया कि एम/एस गणेश ज्वैलरी हाउस (इंडिया) लिमिटेड (SGJHIL) और उसके प्रमोटरों ने 25 बैंकों के कंसोर्टियम के साथ लगभग ₹2,672 करोड़ की धोखाधड़ी की. ED की जांच में यह खुलासा हुआ कि वर्ष 2011-12 के दौरान SGJHIL ने अपने आभूषण व्यवसाय के लिए स्वीकृत ऋण राशि को एम/एस एलेक्स एस्ट्रल पावर प्रा. लि. एवं उससे संबंधित इकाइयों के माध्यम से सोलर पावर परियोजनाओं में डायवर्ट किया.

क्या है धन शोधन का पूरा मामला?


24 अप्रैल, 2012 के एक समझौते के तहत प्रत्युष कुमार सुरेका को एम/एस एलेक्स एस्ट्रल पावर प्रा. लि. का संयुक्त प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया था. लगभग ₹400 करोड़ मूल्य की एक सोलर पावर परियोजना, जिसमें ₹120 करोड़ इक्विटी तथा ₹280 करोड़ बैंक वित्तपोषण (SGJHIL की कॉरपोरेट गारंटी के साथ) शामिल था और जो गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड के साथ दीर्घकालिक पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) से समर्थित थी को धोखाधड़ीपूर्वक एम/एस एलेक्स एस्ट्रल पावर प्रा. लि. के माध्यम से स्थानांतरित किया गया.

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यह स्थानांतरण ₹20 करोड़ से भी कम राशि पर एक फर्जी निवेश समझौते के जरिए किया गया, जिसमें प्रत्युष कुमार सुरेका के नियंत्रण वाली इकाइयां शामिल थीं. यह संबंधित-पक्ष लेनदेन संपत्ति में निहित मूल्य को स्थानांतरित व छिपाने के उद्देश्य से संरचित किया गया, जिससे लेनदार बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों को गंभीर नुकसान हुआ.

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जांच में यह भी सामने आया कि प्रत्युष कुमार सुरेका उक्त पावर प्रोजेक्ट से शुरुआत से ही जुड़े रहे और इसके संचालन व प्रबंधन में शामिल थे. उनकी वास्तविक नेटवर्थ अत्यंत सीमित होने के बावजूद, कई सौ करोड़ रुपये की परिसंपत्तियाँ सर्कुलर ट्रांजैक्शंस, एंट्री ऑपरेटर्स, फर्जी दस्तावेजों तथा जटिल कॉरपोरेट ढांचे के माध्यम से कागजों पर स्थानांतरित की गईं. इन शैम ट्रांजैक्शंस के जरिए सोलर परिसंपत्तियों का कानूनी स्वामित्व और नियंत्रण उस समय SGJHIL और उसके प्रमोटरों से दूर किया गया, जब वे पहले से ही बैंकों की वसूली कार्यवाही का सामना कर रहे थे.

इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से यह भी स्पष्ट हुआ कि कागजों पर फर्जी बिक्री दर्शाए जाने के बावजूद, SGJHIL के प्रमोटर निलेश पारेख को कई वर्षों तक उसी सोलर परिसंपत्ति से उत्पन्न नकदी प्रत्युष कुमार सुरेका के माध्यम से प्राप्त होती रही, जिससे उन्होंने अपराध की आय का उपभोग और उपयोग किया. यह कृत्य PMLA, 2002 की धारा 3 के अंतर्गत धन शोधन के अपराध को आकर्षित करता है.

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कर्मचारियों एवं निदेशकों के बयानों, तलाशी के दौरान एकत्र साक्ष्यों तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के फॉरेंसिक विश्लेषण से यह भी उजागर हुआ कि संयुक्त प्रबंध निदेशक के रूप में प्रत्युष कुमार सुरेका ने फर्जी बोर्ड रेज़ोल्यूशन तैयार किए, बैकडेटेड समझौते किए, डिजिटल सिग्नेचर्स का दुरुपयोग किया और डमी निदेशकों की नियुक्ति कर अपने नियंत्रण को छिपाया तथा धोखाधड़ीपूर्ण लेनदेन के झूठे रिकॉर्ड बनाए. इसके अलावा, एलेक्स एस्ट्रल पावर प्रा. लि. एवं अन्य समूह कंपनियों के फंड्स को शैम लोन, फर्जी खर्च और सर्कुलर ट्रांजैक्शंस के जरिए प्रत्युष कुमार सुरेका और उनके परिवार के नियंत्रण वाली इकाइयों में सायफन किया गया, ताकि दूषित आय को स्वच्छ दिखाया जा सके.

जांच के दौरान कई अवसर दिए जाने के बावजूद प्रत्युष कुमार सुरेका ने सहयोग नहीं किया और विदेश फरार होने का प्रयास किया. 05 जनवरी, 2026 को लुक आउट सर्कुलर के आधार पर उसे कोलकाता एयरपोर्ट पर थाईलैंड जाने की कोशिश करते समय रोका गया. जांच में असहयोग, साक्ष्य नष्ट करने की आशंका, गवाहों को प्रभावित करने, फरार होने के जोखिम तथा अपराध की आय के निरंतर अपव्यय को देखते हुए उसकी गिरफ्तारी की गई. विशेष PMLA न्यायालय ने प्रत्युष को 4 दिनों की रिमांड कस्टडी पर भेज दिया है. आगे की जांच जारी है.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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