EC issues notification: पश्चिम बंगाल में सत्ता की लड़ाई अब एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है. चुनाव आयोग (EC) ने मंगलवार को राज्य में नई विधानसभा के गठन के लिए औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी है. इसके साथ ही बंगाल में चुनाव चक्र आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया है और नई सरकार बनाने की कानूनी प्रक्रिया शुरू हो गई है. हालांकि, निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी हार को 'साजिश' करार देते हुए पद छोड़ने से इनकार कर दिया है. चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, राज्यपाल को अधिसूचना भेज दी गई है. यह एक महत्वपूर्ण संवैधानिक कदम है जो नई सरकार के शपथ ग्रहण का मार्ग प्रशस्त करता है.
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चुनाव आयोग का कड़ा रुख: 'चुनाव निष्पक्ष हुए'
चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के धांधली के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पूरी चुनावी प्रक्रिया मतदान से लेकर मतगणना तक पूरी तरह स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी रही है. आयोग ने चुनाव के संचालन के दौरान सभी मानदंडों का पालन सुनिश्चित किया. आयोग की अधिसूचना ऐसे समय में आई है जब ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है और संवैधानिक पदाधिकारी को कार्रवाई करने की चुनौती दी है.
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राज्यपाल के पास क्या विकल्प?
ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार करने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इंडिया टुडे ने सीनियर वकील शेखर नफड़े के हवाले से लिखा है, राज्यपाल विधानसभा को बर्खास्त कर सकते हैं और सरकार का टर्म 7 मई से खत्म हो जाएगा क्योंकि पांच साल का मैंडेट खत्म हो गया है. अगर ममता नियमों का पालन नहीं करती हैं तो गवर्नर के पास संविधान के नियमों के मुताबिक, सरकार को बर्खास्त करने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा. इंडिया टुडे ने एक और वकील पीडीटी आचार्य के हवाले से लिखा है कि अगर ममता इस्तीफा नहीं भी देतीं, तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता. उन्होंने बताया कि संविधान के मुताबिक, कोई सरकार पांच साल बाद नहीं चल सकती. साथ ही उन्होंने कहा कि अगर ममता बनर्जी चुनाव को चुनौती देना चाहती हैं तो यह एक पोल पिटीशन के जरिए होगा जिस पर बाद में ही सुनवाई होगी.
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ममता का पलटवार: 'जनादेश की लूट हुई'
दूसरी ओर, टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बेहद तीखे तेवर दिखाए. भाजपा द्वारा 207 सीटें जीतकर टीएमसी के 15 साल के शासन को खत्म करने के बाद, ममता ने आरोप लगाया कि करीब 100 सीटों पर नतीजों के साथ छेड़छाड़ की गई है. उन्होंने कहा, "मेरे इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता. यह हार जनता का फैसला नहीं बल्कि एक बड़ी साजिश है. हमारी पार्टी का मनोबल गिराने के लिए जानबूझकर मतगणना की रफ्तार धीमी की गई. मैं राजभवन नहीं जाऊंगी, वे चाहें तो संवैधानिक कार्रवाई कर सकते हैं."
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सड़कों पर संग्राम की तैयारी
71 वर्षीय ममता बनर्जी ने साफ कर दिया है कि वह हार मानकर घर बैठने वाली नहीं हैं. उन्होंने इस "चोरी हुए चुनाव" के खिलाफ सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने की कसम खाई है. ममता अब विपक्षी 'इंडिया' ब्लॉक को और मजबूत करने पर ध्यान देंगी. बंगाल की 294 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा की बड़ी जीत के बाद अब सबकी नजरें राजभवन पर टिकी हैं. क्या अधिसूचना के बाद संवैधानिक पदाधिकारी ममता बनर्जी के खिलाफ कोई कड़ा कदम उठाएंगे? यह देखना दिलचस्प होगा.
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