पश्चिम बंगाल की राजनीति में रविवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब दक्षिण 24 परगना जिले की फलता विधानसभा सीट पर बीजेपी उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने शानदार जीत दर्ज कर ली. री-पोलिंग के बाद हुई मतगणना में उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों को करीब 1 लाख वोटों के बड़े अंतर से हराया. पीएम मोदी ने इसे लोकतंत्र की जीत और धमकियों की हार बताया. ये सीट पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कब्जे में थी. फलता सीट पर पहले चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को हुई थी. लेकिन मतदान के दौरान गड़बड़ी, बूथ कब्जाने और ईवीएम से छेड़छाड़ के आरोप लगे थे. विवाद इतना बढ़ गया कि चुनाव आयोग ने पूरी सीट पर दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया. इसके बाद 21 मई को सभी 285 बूथों पर री-पोल कराया गया. सुरक्षा के लिए भारी संख्या में केंद्रीय बलों की तैनाती की गई थी.

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बीजेपी की ऐतिहासिक जीत

री-पोल में रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया. चुनाव आयोग के मुताबिक 88 प्रतिशत से ज्यादा वोटिंग हुई, जिसे शांतिपूर्ण माना गया. मतदान खत्म होने के बाद से ही बीजेपी अपनी जीत का दावा कर रही थी. बीजेपी उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने पहले ही कहा था कि उनकी पार्टी भारी अंतर से जीत हासिल करेगी. 24 मई को जब मतगणना शुरू हुई तो शुरुआती राउंड से ही बीजेपी उम्मीदवार आगे चल रहे थे. हर राउंड के साथ उनकी बढ़त बढ़ती गई. आखिरकार देबांग्शु पांडा ने 1,49,666 वोट हासिल कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की. सीपीएम उम्मीदवार संभू नाथ कुर्मी दूसरे स्थान पर रहे. कांग्रेस उम्मीदवार अब्दुर रज्जाक मोल्ला तीसरे स्थान पर रहे, जबकि टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान चौथे नंबर पर पहुंच गए.

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TMC के लिए ये हार क्यों है बड़ी?

बीजेपी उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने इसे ऐतिहासिक जीत बताते हुए फलता के लोगों का शुक्रिया अदा किया. उन्होंने कहा कि ये फलता की जनता की जीत है. वहीं, टीएमसी के लिए ये हार इसलिए भी बड़ी मानी जा रही है क्योंकि फलता सीट डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंदर आती है, जिसे टीएमसी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है. इस इलाके में पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी का दबदबा माना जाता है. ऐसे में बीजेपी की इतनी बड़ी जीत ने बंगाल की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है. चुनाव नतीजों के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतदान प्रक्रिया पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान धांधली हुईं.